
अहमदाबाद। शहर के सिविल अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण मामले में 31 वर्षीय महिला के गंभीर संक्रमण, अत्यधिक सूजन और आसपास के महत्वपूर्ण अंगों से चिपके पित्ताशय को दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) पद्धति से सफलतापूर्वक निकाल दिया। निकाले गए पित्ताशय में करीब 400 छोटी-बड़ी पथरियां और मवाद भी था। अस्पताल में पिछले दिनों महिला मरीज को पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द, बुखार और उल्टी की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था।
जांच में पता चला कि पित्ताशय में गंभीर सूजन थी और यह ओमेंटम, ड्यूओडेनम तथा बड़ी-छोटी आंतों से चिपक गया था। मरीज पहले भी पित्ताशय की पथरी के कारण पेंक्रियाज में सूजन की समस्या झेल चुकी थी। उसे पूर्व में भी उपचार दिया गया था। इस बार सोनोग्राफी और सीटी स्कैन में पित्ताशय में बड़ी संख्या में पथरियों और संक्रमण की पुष्टि हुई। मरीज में खून की कमी होने के कारण सर्जरी से पहले दो यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया।
एनेस्थीसिया विभाग की तैयारियों के बाद अस्पताल के डॉ. प्रशांत मेहता और डॉ. विक्रम मेहता के नेतृत्व में सर्जरी की गई। ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती आसपास के अंगों को बिना क्षति पहुंचाए संक्रमित पित्ताशय को अलग करना था। चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी कर पित्ताशय को निकाल दिया। सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि जटिल परिस्थितियों के बावजूद विशेषज्ञ टीम के समन्वय और आधुनिक तकनीक की मदद से सर्जरी सफल रही। उन्होंने जनता से पेट दर्द, उल्टी, बुखार और पाचन संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करने तथा समय रहते चिकित्सा परामर्श लेने की अपील की।
इससे पहले गर्भाशय तक पहुंच चुके प्लेसेंटा की गंभीर स्थिति में अहमदाबाद महानगरपालिका संचालित सरदार वल्लभभाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (एसवीपी) अस्पताल के डॉक्टरों ने 33 वर्षीय महिला का बिना सर्जरी उपचार करने का निर्णय लिया था। टीम ने महिला की स्थिति स्थिर करने के बाद नियमित निगरानी और चिकित्सकीय देखरेख के जरिए उपचार जारी रखा। प्रसव के 90वें दिन गर्भाशय में फंसा प्लेसेंटा अपने आप बाहर निकल गया। इस तरह गर्भाशय निकालने की सर्जरी टल गई और महिला की भविष्य में मां बनने की संभावना सुरक्षित रही।