
AI Risks: दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का जीवन आसान बनाने के भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरा है। इस बीच एक नई रिपोर्ट में दिलचस्प बात सामने आई है कि लगभग आधे युवा तथ्यों की जांच के लिए अब किसी इंसान की तुलना में एआइ पर अधिक विश्वास कर रहे हैं। इस बढ़ती चिंता को देखते हुए रिपोर्ट के लेखकों ने सरकार से शिक्षा में एआइ के उपयोग के लिए 10 सूत्रीय योजना अपनाने का आह्वान किया है, जिसमें शिक्षा विभाग के भीतर एआइ पर एक त्वरित प्रतिक्रिया इकाई की स्थापना के साथ-साथ 100 एआइ चैंपियन स्कूलों और कॉलेजों का एक नेटवर्क बनाना शामिल है।
इंग्लैंड स्थित पब्लिक पॉलिसी रिसर्च एजेंसी द्वारा किया गया यह सर्वे 11 से 24 वर्ष की आयु के 4,000 से अधिक लोगों पर किया गया था। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर आज के स्कूल और कॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) को अपनी पढ़ाई में शामिल नहीं करते हैं या इसे नजरअंदाज करते हैं, तो छात्रों को लगेगा कि स्कूल जाना समय की बर्बादी है। और एआइ के प्रति विश्वास और भी मजबूत हो सकता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंग्लैंड की शिक्षा प्रणाली एक ऐसे एआइ-विहीन दुनिया के लिए पढ़ाने की कोशिश कर रही है, जो अब अस्तित्व में नहीं है। जबकि अधिकांश युवा लगभग 87% एआइ टूल का उपयोग करने का अनुभव रखते हैं। शिक्षा संस्थान इस बात से तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं कि युवा एआइ का उपयोग किस तरह और कितनी मात्रा में कर रहे हैं। यह अंतर संस्था के कथित मूल्य में कमी के रूप में सामने आने लगा है।
साथ जुड़े बड़े जोखिम
मैकिंजी के अनुसार, साल 2030 तक दुनिया भर में एआइ के लिए डाटा सेंटर बनाने पर करीब 6.7 लाख करोड़ डॉलर खर्च करने होंगे। डाटा सेंटर एआइ की बुनियाद हैं। दूसरी ओर माइक्रोसॉफ्ट का सालाना राजस्व 33,180 करोड़ डॉलर है। अमेजन 71,692 करोड़, गूगल 40,283 करोड़ और मेटा 20,096 करोड़ मिलकर भी इस रकम से काफी पीछे रह जाते हैं। वहीं, प्रमुख एआइ कंपनियां एंथ्रोपिक और ओपनएआइ मुनाफे में नहीं हैं, बल्कि निवेश के जरिए पैसा जुटा कर खर्च कर रही हैं।
एआइ तकनीक के दिमाग यानी डाटा सेंटरों के लिए 2025 में 44 गीगावाट बिजली चाहिए थी। 2030 तक यह मांग 156 गीगावाट पहुंच जाएगी। कुछ रिपोट्र्स इसे 200 गीगावाट से अधिक मानती हैं। यह जरूरत भी एक बड़ी बाधा बन सकती है।
प्रमुख कंपनियों द्वारा अपने आइपीओ को भी टाला टाला जा रहा है। ओपनएआइ ने 12 सितंबर को बताया कि वह इस साल शेयर बाजार में नहीं उतरेगी। एंथ्रोपिक ने भी इसे टाल दिया है। इसकी वजह कंपनियों के खराब प्रदर्शन और तकनीक के विकास के लिए भारी राशि की जरूरत को माना जा रहा है, जिसके चलते आशंका है कि इन्हें बाजार में नुकसान हो सकता है।