अजित पवार की दुखद मृत्यु के बाद क्या महाराष्ट्र में बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार बनी रहेगी या फिर अजित के नहीं रहने का असर सरका पर पड़ेगा।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की आज सुबह प्लेन दुर्घटना में मौत हो गई है। यह खबर सामने आने के बाद से ही देशभर में मातम छाया हुआ है। अजित का यूं अचानक दुनिया छोड़कर चले जाना महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक बड़ा नुकसान बताया जा रहा है। अजित पिछले दो दशकों से अधिक समय से महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पिछले एक दशक से वह सत्ता में बने हुए हैं। उनकी मौत से पूरे राज्य में सनसनी फैल गई है लेकिन अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या अजित के अचानक चले जाने से महाराष्ट्र में बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार पर कोई फर्क पड़ेगा। क्या राज्य में सरकार गिर जाएगी।
अपने चाचा शरद पवार का हाथ पकड़कर उनकी पार्टी एनसीपी के जरिए राजनीति में कदम रखने वाले अजित ने दशकों के साथ के बाद 2019 में उनके साथ भीतरघात कर दिया। अजित ने शरद पवार की मर्जी के बिना बीजेपी से हाथ मिलाया और उनके साथ गठबंधन की सरकार बनाते हुए उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि उस दौरान शरद पवार की पकड़ पार्टी में अजित से काफी मजबूत थी और उनके कहने पर विधायकों ने अजित का साथ छोड़ दिया और महज तीन दिनों में अजित को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि इसके बावजूद अजित एनसीपी में ही बने रहे।
अजित ने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी और अंदर ही अंदर पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत करने लगे। समय था 2023 के चुनावों का और इस बार अजित ने एक बार फिर शरद पवार से बगावत की और पार्टी का बड़ा हिस्सा अपने कब्जे में ले लिया। अजित ने शरद पवार को पूरी तरह लाचार कर दिया और उनकी ही पार्टी का चिन्ह उनसे हथिया लिया। अजित ने बीजेपी और एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई और फिर से राज्य के उप मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2024 के चुनावों में इसी गठबंधन ने भारी बहुमत से जीत हासिल की और महाराष्ट्र में सरकार बनाई और अजित एक बार फिर उपमुख्यमंत्री बने।
इन चुनावों में 288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में बीजेपी ने 132 सीटें हासिल की जो कि बहुमत से सिर्फ 12 कम थी। वहीं शिंदे गुट को 57 सीटें मिली और एनसीपी ने 41 सीटों पर जीत हासिल की। ऐसे में देखा जाए तो भाजपा के पास पहले ही भी बड़ी संख्या में विधायक मौजूद है और एकनाथ शिंदे की पार्टी भी उनके साथ है। इसलिए अजित पवार की मौत का असर महाराष्ट्र की राजनीति पर नहीं पड़ेगा। एनसीपी इस गठबंधन से अलग भी हो जाती है तो भी महाराष्ट्र में बीजेपी की ही सरकार बनी रहेगी।