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अजित पवार के जाने के बाद सियासी समीकरण बदलेगा या नहीं? PM मोदी पर शरद की सांसद का बयान क्या दे रहे संकेत?

महाराष्ट्र में अजित पवार के निधन के बाद सियासी हलचल तेज हुई है। एनसीपी (एसपी) की राज्यसभा सांसद फौजिया खान ने पीएम मोदी के राज्यसभा भाषण की तारीफ की, लेकिन सवाल उठाया कि वह कितना वास्तविक और सच्चा था।

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Feb 06, 2026
शरद पवार और अजित पवार (Photo: IANS)

महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र में सियासी समीकरण बदलने के संकेत मिल रहे हैं। एनसीपी (एसपी) प्रमुख शारद पवार की सांसद फैजिया खान ने राज्यसभा में पीएम मोदी के संबोधन की तारीफ की है। इसके साथ, कुछ सवाल भी खड़े किए हैं।

प्रधानमंत्री के राज्यसभा में दिए गए संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी (एसपी) की राज्यसभा सदस्य फौजिया खान ने कहा कि भाषण सुनने में जरूर अच्छा था, लेकिन सवाल यह है कि वह कितना वास्तविक और सच्चा था।

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फौजिया बोलीं- बातें बड़ी की गईं

फौजिया खान ने आगे कहा कि भाषण कितना जमीन से जुड़ा हुआ था, इस पर उन्हें गहरी शंका है। उनके मुताबिक, बातें तो बहुत बड़ी की गईं, लेकिन आम लोगों की समस्याओं का ठोस समाधान कहीं नजर नहीं आया।

उधर, मेघालय में हुए कोयला खदान ब्लास्ट पर भी फौजिया ने दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह एक बेहद दुखद घटना है, जिसमें 18 लोगों की जान चली गई।

उन्होंने अवैध खनन को इस हादसे की बड़ी वजह बताते हुए कहा कि गैरकानूनी माइनिंग पर नियंत्रण करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।

फौजिया ने यह भी उठाया सवाल

फौजिया ने सवाल उठाया कि जब हर जगह अवैध खनन हो रहा है, इसमें करोड़ों रुपए का खेल चल रहा है, और ठेकेदार एवं ऑपरेटर इससे जुड़े हैं, तो फिर इसे रोका क्यों नहीं जा रहा। उन्होंने कहा कि कब तक हमारे मजदूरों और गरीब लोगों की जानें जाती रहेंगी।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बयान पर भी फौजिया खान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 'मियां' शब्द का इस्तेमाल करना और भीख मांगने वाले को लेकर पांच रुपए की बात कहना बेहद निंदनीय और शर्मनाक है।

फौजिया ने क्या कहा?

फौजिया ने सवाल उठाते हुए कहा कि कोई कहता है कि भैंस चुरा लेंगे, कोई कहता है कि मंगलसूत्र चुरा लेंगे और कोई कहता है कि वोटर लिस्ट से पांच लाख नाम काट दिए जाएंगे। यह सब क्या है? क्या इसी को लोकतंत्र कहते हैं? संवैधानिक पद पर बैठे लोगों के लिए एक स्पष्ट आचार संहिता होनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि ऐसे नेताओं को संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए और अगर वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें उस पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह समाज को बांटने वाली है और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

राजनीतिक दलों पर मुस्लिम नेताओं को लेकर उठाए सवाल

फौजिया खान ने राजनीतिक दलों पर मुस्लिम नेताओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्या मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व कुछ पार्टियों को पसंद नहीं है? अगर नहीं, तो इस बात को खुलकर क्यों नहीं कहा जाता? बार-बार पुराने और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

रेवंत रेड्डी पर भी दी प्रतिक्रिया

इसके अलावा, फैजिया ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और जमीयत-उलेमा हिंद से जुड़े विवाद पर भी अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में कई संगठनों और समुदायों का अहम योगदान रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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Published on:
06 Feb 2026 02:44 pm
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