
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार नहीं रहे। (फोटो- ANI)
Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar Plane Crash Death: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं रहे। प्लेन क्रैश में उनका निधन हो गया है।
मुंबई से बारामती जा रहा उनका चार्टर्ड प्लेन बुधवार सुबह 8.45 बजे लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया। पवार जिला परिषद चुनाव के लिए एक जनसभा में शामिल होने बारामती जा रहे थे।
अजित पवार महाराष्ट्र के एक प्रमुख और प्रभावशाली राजनेताओं में एक थे। वे दिग्गज देता और एनसीपी के प्रमुख शरद पवार के भतीजे थे।
अजित पवार का जन्म महाराष्ट्र में अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ था। उनका पैतृक गांव पुणे जिले में बारामती तालुका के काटेवाड़ी में है।
अजित पवार ने साल 1982 में राजनीति में एंट्री ली थी। तब वे महज 23 वर्ष के थे। उन्होंने सहकारी चीनी मिल के बोर्ड में चुनाव जीतकर चुनावी दुनिया में कदम रखा था।
उस समय अजित के चाचा शरद पवार महाराष्ट्र के बड़े नेता के रूप में उभर चुके थे। वह सहकारी क्षेत्र में बहुत प्रभावशाली थे। माना जाता है कि इस बात का भी अजित को फायदा मिला।
शरद पवार ने भी सहकारी आंदोलन को राजनीति में आने का आधार बनाया था। अजित ने वही रास्ता अपनाया और सफल भी हुए।
अजित के पिता अनंतराव पवार की मौत हो चुकी थी, इसलिए अजित को ही परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। पढ़ाई बीच में छोड़कर वे बारामती इलाके में सक्रिय हो गए।
सहकारी संस्थाओं में प्रवेश महाराष्ट्र की ग्रामीण राजनीति का बहुत बड़ा हिस्सा है, क्योंकि यहां से नेता जनता से जुड़ते हैं, विकास कार्य करवाते हैं और वोट बैंक बनाते हैं। अजित ने इसी से शुरुआत की।
साल 1991 में अजित के जीवन में एक बड़ा मोड़ आया। वह पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष चुने गए। वे 16 साल (1991 से 2007 तक) तक लगातार इस पद पर बने रहे। 1991 में ही अजित पहली बार सांसद भी बने।
बारामती से उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता और पहली बार लोकसभा पहुंचे। हालांकि, लगभग डेढ़ महीने बाद उन्होंने यह सीट चाचा शरद पवार के लिए छोड़ दी थी।
दरअसल, शरद पवार को 1991 में पी वी नरसिम्हा राव की केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री बनाया गया था। संसद में वापस भेजने के लिए अजित पवार ने अपनी सीट खाली कर दी थी। जिसके बाद, बारामती सीट पर उपचुनाव हुआ था।
इसके बाद अजित पवार ने उसी साल (1991) बारामती विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधायक बने और राज्य स्तर पर राजनीति में सक्रिय हो गए। तब से आज तक (2026 तक) वे बारामती से विधायक बनते आए, कभी चुनाव नहीं हारे।
दिलचस्प बात यह है कि 1991 से लेकर अब तक अजित कई बार मंत्री और उपमुख्यमंत्री बन चुके हैं। भले ही वे कभी मुख्यमंत्री नहीं बने, लेकिन सत्ता में बने रहने के लिए मशहूर थे। महाराष्ट्र में छह बार अजित पवार उपमुख्यमंत्री बने।
सिंचाई और वित्त उनके पसंदीदा विभाग थे। सिंचाई मंत्री रहते हुए कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया, लेकिन विवाद भी रहे। साल 2012 में उन पर सिंचाई घोटाले का आरोप लगा।
इसके बाद, साल 2019 में 3-दिन वाली सरकार को लेकर भी वह विवादों में रहे। साल 2023 में उन्होंने चाचा से बगावत कर दी और NCP को तोड़कर एनडीए में चले आए। जहां उन्हें राज्य सरकार में डिप्टी सीएम बनाया गया।
Updated on:
28 Jan 2026 10:52 am
Published on:
28 Jan 2026 10:50 am
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