महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी प्रमुख अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को बारामती में विमान दुर्घटना में निधन हो गया, जिससे राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा कि अजित पवार के जाने से महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर निश्चित रूप से बदलेगी। (
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी प्रमुख अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके जाने के बाद महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल आ गया है। इस बीच, शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने बड़ी बात कर दी है।
शिवसेना (यूबीटी) ने शुक्रवार को पार्टी के मुखपत्र सामना में कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के जाने से महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर में निश्चित रूप से बदलाव आएगा।
संपादकीय में कहा गया- अब अजित पवार के के प्रभावशाली समर्थक एक नए संरक्षक की तलाश करेंगे, उन्हें निश्चित रूप से 'दूसरा' दादा कभी नहीं मिलेगा, जो अब नहीं रहे। उनकी मृत्यु ने कई लोगों के जीवन को तबाह कर दिया है। जब लोगों का एक सच्चा नेता चला जाता है तो ऐसा होना स्वभाविक है।
संपादकीय में यह भी कहा गया कि अजीत दादा की राजनीति व्यावहारिक थी, जिसमें संयम और समझदारी थी। जबकि शरद पवार की पार्टी में प्रभावशाली और जमींदार लोग (वतनदार) थे।
दादा ने इन प्रभावशाली हस्तियों को साथ लेकर और उनकी जीत सुनिश्चित करके सत्ता की राजनीति की। हालांकि, उनमें उस शक्ति का उपयोग आम आदमी के फायदे के लिए करने का अनोखा कौशल था।
ठाकरे खेमे ने कहा- अजित दादा उस उम्र में अनंत में विलीन हो गए जब उन्हें इस दुनिया को नहीं छोड़ना चाहिए था। जबकि समाज पर बोझ बने कई लोग अभी भी हैं, भगवान ने महाराष्ट्र के प्यारे नेता को छीन लिया, जिससे राज्य गहरे दुख में डूब गया। महाराष्ट्र के हर कोने से लाखों लोग बारामती में उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए इकट्ठा हुए।
संपादकीय में आगे कहा गया- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी अजीत दादा पर 70,000 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले का आरोप लगाया था, उन्होंने अपनी श्रद्धांजलि में कहा कि दादा का असामयिक निधन एक अपूरणीय क्षति है।
संपादकीय में आगे कहा गया- पीएम ने कहा कि दादा को महाराष्ट्र के विकास और सहकारी क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा। पीएम मोदी ने गृह मंत्री अमित शाह को अंतिम संस्कार के लिए अपने विशेष दूत के रूप में भेजा, जहां दादा को पूरे राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई।
संपादकीय में कहा गया कि पीएम मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा लगाए गए सिंचाई घोटाले के आरोप पूरी तरह से झूठे थे। वे कोई भी आरोप साबित नहीं कर पाए, फिर भी उन्होंने उन्हें बड़े पैमाने पर बदनाम किया।
संपादकीय में सुझाव दिया गया है कि अगर दादा को इन आरोपों के झूठे जाल में नहीं फंसाया गया होता, तो शायद उन्होंने कभी भी अपने घर को छोड़कर विरोधी खेमे में शामिल होने का फैसला नहीं किया होता।
संपादकीय ने आगे कहा गया- BJP के साथ सरकार में शामिल होने के बावजूद, अजीत दादा ने अपना चरित्र कभी नहीं छोड़ा। वह बार-बार दिल्ली नहीं गए, और न ही उन्होंने कभी मोदी, शाह या फडणवीस को अपना सुप्रीम लीडर माना।
उन्होंने सामाजिक बंटवारे के BJP के एजेंडे को नहीं अपनाया। वह 'हिंदू-मुस्लिम', 'भारत-पाकिस्तान' या 'बंटेंगे तो कटेंगे' जैसे नारों से दूर रहे।
पार्टी ने संपादकीय में कहा- नगर निगम चुनाव के दौरान, अजित दादा ने BJP की पसंद को नजरअंदाज किया और शरद पवार की पार्टी के साथ गठबंधन किया।
उन्होंने बहादुरी से इस बात का सबूत दिया कि BJP के कार्यकाल में पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ को कैसे लूटा गया। जब उन्हें धमकी दी गई कि सिंचाई घोटाले की फाइलें अभी भी खुली हैं, तो उन्होंने उतनी ही ताकत से जवाब दिया कि उनके पास भी BJP के अपने सिंचाई घोटालों की फाइलें हैं, खासकर पुरंदर में एक प्रोजेक्ट का जिक्र किया, जहां कथित तौर पर पार्टी फंड में पैसा पहुंचाने के लिए टेंडर की कीमतें बढ़ाई गईं।