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493 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में अल-फलाह यूनिवर्सिटी चेयरमैन की बढ़ी मुश्किलें, कोर्ट ने भेजा 3 दिन की पुलिस हिरासत में

Al-Falah University: 493 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को साकेत कोर्ट ने 3 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। मामले में पहले जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।

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अल-फलाह यूनिवर्सिटी चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की बढ़ी मुश्किलें (Photo-IANS)

Al-Falah Trust case: अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन और तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन के डायरेक्टर जवाद अहमद सिद्दीकी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शनिवार को दिल्ली की साकेत कोर्ट ने उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजने की अनुमति दे दी। आपको बता दें कि जवाद अहमद सिद्दीकी को 493 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में 24 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले ही इस मामले में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुका है। उन पर आरोप है कि उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के जरिए करोड़ों रुपये की गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की।

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एडमिशन और फीस के नाम पर पैसे जुटाने का आरोप

ईडी का आरोप है कि अल-फलाह ट्रस्ट और उससे जुड़े संस्थानों ने छात्रों के एडमिशन और फीस के जरिए करीब 493.24 करोड़ रुपये जुटाए। जांच एजेंसी के अनुसार यह पैसा गलत तरीके से कमाया गया। ईडी का कहना है कि इस पूरे काम में कई शैक्षणिक संस्थानों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही मेडिकल कॉलेज समेत कुछ संस्थानों की मान्यता और उनके संचालन से जुड़े दस्तावेजों में भी गड़बड़ियां सामने आई हैं।

साथ ही यह भी आरोप है कि संस्थानों के लिए हरियाणा सरकार से Essentiality Certificate और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से अनुमति लेने के समय गलत जानकारी दी गई। ईडी का मानना है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर संस्थानों को मंजूरी मिली और बाद में इससे बड़े स्तर पर आर्थिक फायदा उठाया गया।

जमानत याचिका हो चुकी है खारिज

इस मामले में जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत 2 मई को पहेल ही खारिज कर दी गई थी। एड्शनल सेशंस जज (ASJ) शीतल चौधरी प्रधान ने आरोपी और ईडी दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया था। ईडी ने कोर्ट में कहा कि जुटाए हुए पैसों को कई निजी कंपनियों के जरिए ट्रांसफर किया गया। इनमें अमला एंटरप्राइजेज LLP, करकुन कंस्ट्रक्शंस एंड डेवलपर्स और दियाला कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों का नाम शामिल है। एजेंसी के अनुसार, ये कंपनियां आरोपी के परिवार और करीबी कर्मचारियों से जुड़ी थीं, लेकिन जवाद अहमद सिद्दीकी ही सब संभालते थे।

NAAC और UGC मान्यता को लेकर भी उठे सवाल

ईडी ने कोर्ट को बताया कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े संस्थानों ने NAAC और UGC से जुड़ी मान्यता की जानकारी गलत तरीके से पेश की। आरोप है कि संस्थानों की मान्यता को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया, ताकि छात्र और अभिभावक उन पर भरोसा करें। ईडी के अनुसार इसी आधार पर कई सालों तक फीस वसूली गई और करोड़ों रुपये कमाए गए। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

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