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Water Revolution: लोहारी में जल क्रांति की तैयारी, जहां कुएं में उतरकर लोटे से पानी भरते है गांव वाले, 504 गड्ढों में स्टोर करेंगे बारिश का पानी

Preparation for Water revolution: कंटूर ट्रेंच और अर्दन गुलीपलक से हर साल संग्रहित होगा 2 लाख लीटर बारिश का पानी, लोहारी सरपंच का कहना- सरकार के पानी बचाओ अभियान प्रशिक्षण से मिली है प्रेरणा
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Water revolution

Water revolution in Lohari village, कुएं में उतरकर लोटे से पानी निकालता ग्रामीण (Photo- Patrika)

बैकुंठपुर. एमसीबी जिले के ग्राम पंचायत लोहारी सहित आश्रित गांव नवापारा में भीषण गर्मी में पेयजल संकट (Water crisis) से ग्रामीण जूझ रहे हैं। हालत यह है कि कुएं में उतरकर लोटे से पीने का पानी भरने को वे विवश हैं। उक्त गांव में अब जल क्रांति की तैयारी शुरु हो गई है। दरअसल बारिश के पानी को स्टोर कर ग्राउंड वाटर लेवल रिचार्ज करने की तैयारी है। ग्राम पंचायत में मनरेगा मद से 504 कन्टूर ट्रेंच (गड्ढों) का निर्माण कराया गया है। इनमें लगभग 2 लाख लीटर पानी संरक्षित होने की उम्मीद है।

एमसीबी जिले की कई ग्राम पंचायतों में हर साल गर्मी के साथ जल संकट से ग्रामीण पेयजल को लेकर जद्दोजहद करते हैं। क्योंकि ग्राम पंचायत लोहारी, नागपुर, बरबसपुर क्षेत्र में जल स्तर 500-600 फीट नीचे चला गया है। मामले में ग्राम पंचायत लोहारी ने पानी बचाने (Save water) की दिशा में ग्राम पीपरपारा से विशेष पहल की शुरुआत की है। इससे आने वाले समय में ग्राउंड वाटर लेवल रिचार्ज होने के साथ ही क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है।

भीषण गर्मी, सूखते जलस्रोत और लगातार गिरते भूजल स्तर की समस्या से निपटने मनरेगा के तहत कंटूर ट्रेंच और अर्दन गुलीपलक निर्माण कार्य कराया गया है। इसमें बारिश के उस पानी को रोका जाएगा, जो हर साल बहकर नदियों के रास्ते दूर निकल जाता है, जबकि गांव प्यास से जूझते रहते हैं। ग्राम पंचायत लोहारी के मुताबिक इस पहल की प्रेरणा भारत सरकार के पानी बचाओ अभियान (Water revolution in Lohari Village) के तहत मिले प्रशिक्षण से मिली।

वर्षा जल को जमीन में उतारने की व्यवस्था करने से जल संकट को काफी हद तक कम कर सकते हैं। ग्राम पंचायत में मनरेगा मद से 504 कन्टूर ट्रेंच का निर्माण कराया गया है। इनमें लगभग 2 लाख लीटर पानी संरक्षित होने की उम्मीद है। इसके अलावा अर्दन गुलीपलक निर्माण के माध्यम से करीब एक लाख लीटर पानी को रोका जाएगा। जिससे पंचायत में भूजल स्तर में सुधार होगा।

ऐसी स्थिति है नवापारा गांव की

ग्राम पंचायत लोहारी के नवापारा गांव में भीषण गर्मी में पेयजल संकट गहराने से ग्रामीण बूंद-बंूद को तरस रहे हैं। ग्रामीण गहरे कुएं में उतरकर लोटे से बाल्टी-डिब्बा में पानी भरने को मजबूर हैं। ग्राम नवापारा में करीब ३०० आबादी है। जहां भीषण गर्मी में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। हालात इतने भयावह है कि ग्रामीण पीने के पानी के लिए एकमात्र कुएं के नीचे उतरते हैं।

कोई रात 1 बजे तक पानी ढो रहा है तो कोई भोर में 4 बजे से बर्तनों के साथ कुएं के पास डेरा डाल देता है। बावजूद कई परिवारों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। नवापारा में एकमात्र कुआं है, जहां सुबह से देर रात तक लोगों की कतारें लगी रहती हैं। भीषण गर्मी में कुएं का पानी भी नीचे चला गया है।

इससे ग्रामीणों को कई मीटर नीचे उतरकर बर्तनों में पानी भरना पड़ रहा है। कई बार घंटों इंतजार के बाद भी कुछ लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। फिलहाल 2 सप्ताह से टैंकर से गांव में जलापूर्ति (Water supply) भी कर रहे हैं। गांव में कराए गए अधिकांश बोर फेल हो चुके हैं। केवल एक-दो बोर ही सफल हैं।

हालांकि, जल जीवन मिशन के तहत नवापारा में वर्ष 2022 में सिंगल विलेज पाइप्ड वाटर सप्लाई स्किम के तहत 33 लाख खर्च किया गया है। वर्ष 2023 से लाई समूह जल प्रदाय योजना के तहत 24.19 करोड़ की लागत से बने प्रोजेक्ट से गांव को जोड़ा गया है।

Lohari water revolution: सरपंच का है ये कहना

ग्राम पंचायत लोहारी की सरपंच मोती सिंह ने कहा कि भारत सरकार के पानी बचाओ अभियान के तहत प्रशिक्षण से प्रेरणा मिली है। वर्षा के जल को जमीन में उतारने की व्यवस्था करने से जल संकट (Water crisis in Lahori) को काफी हद तक कम कर सकते हैं। इसी सोच के साथ पंचायत में 504 कंटूर ट्रेंच का निर्माण कराया गया है। इसमें 2 लाख लीटर पानी संरक्षित होने की उम्मीद है।

ग्रामीण राम सजीवन साहू ने कहा कि लोहारी और आसपास के पहाड़ी इलाकों में हर साल गर्मियों में हालात बेहद गंभीर हो जाते हैं। कई जलस्रोत सूख जाते हैं और लोगों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई बार स्थिति इतनी विकट हो जाती है कि ग्रामीणों को कुओं में उतरकर पानी निकालना पड़ता है। फिर गर्मी के अंतिम दौर में टैंकर ही एकमात्र सहारा बन जाते हैं।

ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद है यह

एमसीबी कलेक्टर संतन देवी जांगड़े (MCB Collector) का कहना है कि वर्षा जल संचयन की यह पहल ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। जल संरक्षण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। मनरेगा से डबरी, कुएं, तालाब गहरीकरण, सामुदायिक तालाब और वाटर रिचार्ज के कार्य कराए जा रहे हैं। विशेष रूप से जल संकट प्रभावित और पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी संरचना को प्राथमिकता दी जा रही है। यह अभियान न केवल भूजल स्तर बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि भविष्य में जिले को जल संकट की चुनौती से उबारने की दिशा में भूमिका निभाएगा।

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