इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर यादव आज रिटायर हो रहे हैं। जस्टिस शेखर के खिलाफ एक साल से महाभियोग नोटिस लंबित है। उनके खिलाफ महाभियोग नोटिस क्यों लाया गया, आइए जानते हैं…
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक कार्यक्रम में टिप्पणियों को लेकर विवाद में आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर यादव अपने खिलाफ महाभियोग का नोटिस लंबित रहते ही बुधवार को रिटायर हो जाएंगे। उनके खिलाफ राज्यसभा सभापति को विपक्ष की ओर से दिया गया महाभियोग का नोटिस सांसदों के हस्ताक्षरों के सत्यापन को लेकर करीब 1 साल से लंबित है।
जस्टिस शेखर यादव ने दिसंबर 2024 में विहिप के कार्यक्रम में टिप्पणी की थी कि भारत बहुसंख्यक आबादी की इच्छा के अनुसार चलेगा और केवल वही स्वीकार्य होगा जो बहुसंख्यकों का कल्याण और खुशी को सुनिश्चित करता हो। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के बारे में भी टिप्पणियां की थीं। जस्टिस यादव की टिप्पणियों पर बार एसोसिएशन के सदस्यों और कुछ संगठनों ने उन्हें पद से हटाने की मांग की थी। उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आंतरिक जांच की मांग देश के तत्कालीन चीफ जस्टिस (सीजेआइ) ने राज्यसभा के पत्र के आधार पर खारिज कर दी थी कि यह मामला सदन के अधिकार क्षेत्र में आता है।
विश्व हिंदू परिषद के विधि प्रकोष्ठ (लीगल सेल) ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के लाइब्रेरी हॉल में 8 दिसंबर को एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर यादव शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में जस्टिस शेखर यादव के अलावा इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक और मौजूदा जज जस्टिस दिनेश पाठक भी शामिल हुए थे। कार्यक्रम में वक्फ बोर्ड अधिनियम', धर्मान्तरण-कारण एवं निवारण और समान नागरिक संहिता एक संवैधानिक अनिवार्यता जैसे विषयों पर अलग-अलग लोगों ने अपनी बात रखी थी।
UCC के मुद्दे पर जस्टिस शेखर यादव ने रखी थी बात
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के मुद्दे पर इस दौरान जस्टिस शेखर यादव ने अपनी बात रखी थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि हिन्दुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यक के अनुसार ही देश चलेगा। जस्टिस शेखर यादव का कहना था कि एक से ज्यादा पत्नी रखने, 3 तलाक और हलाला के लिए कोई बहाना नहीं है और अब ये प्रथाएं नहीं चलेंगी। जस्टिस यादव की इस स्पीच से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इसके बाद उनकी खूब आलोचना भी हुई।