समाज में बढ़ते गन कल्चर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने गन कल्चर को समाज के लिए खतरा बताया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने समाज में बढ़ते गन कल्चर (Gun Culture) पर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट के जस्टिस विनोद दिवाकर (Justice Vinod Diwakar) की पीठ ने कहा कि बिना नियंत्रण के हथियारों की उपलब्धता समाज के लिए गंभीर खतरा बन रही है। कोर्ट ने कहा कि कई लोग, खासकर राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले या संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति, लाइसेंसी हथियारों का इस्तेमाल प्रभाव और दबदबा दिखाने के लिए कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में समाज में डर का माहौल बनता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ते गन कल्चर पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि बिना नियंत्रण के हथियारों तक पहुंच समाज के लिए बड़ा खतरा बन रही है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में हथियार लाइसेंस से जुड़ा व्यापक डेटा भी मांगा। जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने कहा- राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले या संदिग्ध पृष्ठभूमि के लोग लाइसेंसी हथियारों का इस्तेमाल दबदबा दिखाने के लिए कर रहे हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दबदबा दिखाने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करने से समाज में डर का माहौल बनता है। कोर्ट ने खासतौर पर इंस्टा रील्स पर हथियार दिखाने पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से कानून के शासन के बजाय डर का माहौल बनता है। यह न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास को कमजोर करता है। शक्ति, छवि और सोशल मीडिया का यह मेल इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस बात पर भी सख्त आपत्ति जताई कि एक ही परिवार के कई सदस्य अलग-अलग लाइसेंस लेकर कई हथियार रखते हैं। कोर्ट ने कहा कि इसकी गंभीर न्यायिक जांच जरूरी है। इसके साथ ही यूपी के सभी जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया गया है कि वे जिला और थाना स्तर पर हथियार रखने वाले लोगों का डेटा तैयार करें। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या लाइसेंस का कोई सेंट्रल डेटाबेस तैयार किया है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हथियारों के बढ़ते कल्चर पर नाराजगी जाहिर करते हुए सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने जौहरी जय शंकर उर्फ बैरिस्टर की याचिका पर सुनवाई करते हुए भदोही के जिला मजिस्ट्रेट और अपीलीय प्राधिकारी से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। याची जय शंकर ने अपनी आर्म्स लाइसेंस की अर्जी लगभग 4 साल पहले दी थी।
पुलिस रिपोर्ट 2018 में उनके पक्ष में आने के बावजूद जिला मजिस्ट्रेट ने 2022 में बिना कोई ठोस कारण बताए आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद दायर अपील को भी 2025 में बिना कोई कारण बताए खारिज कर दिया गया।
जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने इस अनावश्यक देरी और बिना कारण आदेश पारित करने पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लापरवाही भरे रवैये से आम नागरिकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।कोर्ट ने डीएम और अपीलीय प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि वे मामले में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल 2026 को होगी।