
Amit Shah Letter Om Birla: संसद में विपक्ष के हंगामे के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखी है। शाह ने छात्र आंदोलन पर सदन में चर्चा की मांग की। शाह ने चिट्ठी में लिखा कि आप विपक्ष से चर्चा कर, आपसी सहमति से आज से जितने समय, जितने घंटे आप उचित समझें, उतना समय आवंटित करने की कृपा करें। मैं निर्धारित समय के दौरान सदन में उपस्थित रहकर, इस मुद्दे पर चर्चा में भाग लेना चाहता हूं और विपक्ष के सभी प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार हूं।
अमित शाह ने आगे लिखा कि लोकतंत्र में चर्चा और संवाद से ही समाधान निकलता है। मेरा, लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं में अटूट विश्वास है और मेरा यह मानना है कि यह सदन चर्चा और संवाद के लिए ही है।
बता दें कि इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधा था। उन्होंने विपक्षी सांसदों पर सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चलने देने का भी आरोप लगाया। अमित शाह ने कहा कि जब से संसद का सत्र शुरू हुआ है, वह नियमित रूप से आ रहे हैं और अपने कक्ष में बैठ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष दोनों सदनों में संसद की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है। ऐसे में जब सदन की कार्यवाही ही नहीं चलने दी जा रही है, तो किसी के अंदर जाकर बैठने का क्या मतलब है?
इस दौरान नीट से जुड़े छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार NEET से जुड़े छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के सभी पहलुओं पर चर्चा के लिए तैयार है। विपक्ष ने शुरुआत में मांग की थी कि चर्चा के लिए समय दिया जाए और सरकार इसके लिए सहमत हो। मैंने भी अपनी ओर से स्पष्ट कर दिया है कि मैं संसद में सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं। लेकिन वे चर्चा ही नहीं होने देना चाहते।
अमित शाह के बयान पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पलटवार किया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा है कि हमें अमित शाह का भाषण या उपदेश सुनने में कोई रुचि नहीं है। जब मैं ‘हम’ कहता हूं, तो मेरा मतलब इस देश की युवा पीढ़ी से है।
उन्होंने कहा कि छात्रों पर गोली किसने चलाई? छात्रों को कीलों वाली लाठियों से पीटने का आदेश किसने दिया? क्या अमित शाह ने हमारे बच्चों पर गोली चलाने का आदेश दिया था? अगर उन्होंने ऐसा आदेश दिया था, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। पिछले 20 दिनों से अमित शाह गायब हैं। भारत के गृह मंत्री में कोई साहस नहीं है; वे सदन में आने की हिम्मत नहीं कर सकते।