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बहन का रेप करने वाले भाई को मिली उम्र कैद की सजा, कोर्ट ने इसे बताया पाप

युपिआ के पापुम पारे ज़िला अदालत ने एक 23 वर्षीय आरोपी को अपनी 19 साल की चचेरी बहन का रेप करने के आरोप में उम्र कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इसे दुर्लभतम से दुर्लभ अपराध बताते हुए आरोपी की नरमी की अपील को खारिज कर दिया है।
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Oct 09, 2025
man sentenced to life imprisonment for raping cousin sister
बहन का रेप करने के आरोपी भाई को उम्रकैद की सजा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अरुणाचल प्रदेश में एक दिल दहला देने वाले मामले का खुलासा हुआ है। यहां एक 23 साल के भाई को अपनी 19 साल की चचेरी बहन का रेप करने के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। एक सत्र न्यायालय ने गुरुवार को 2022 के एक मामले में यह सजा सुनाते हुए इस अपराध को पाप और सामाजिक बुराई बताया है। कोर्ट का मानना है कि इस तरह का अपराध सख्त सज़ा की मांग करता है और आरोपी के साथ नरमी नहीं बरती जा सकती है।

कोर्ट ने कहा यह दुर्लभतम से दुर्लभ अपराध

युपिआ के पापुम पारे ज़िला अदालत के सेशन जज हिरेंद्र कश्यप ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(f) के तहत दोषी ठहराया है, जो कि किसी विश्वास पात्र द्वारा रेप किए जाने के मामलों से संबंधित है। कोर्ट ने यह पाया कि आरोपी जो कि पीड़ित का बड़ा भाई होने के नाते एक भरोसे के पद पर था उसने पीड़िता के साथ बेरहमी से रेप किया है। अदालत ने इस अपराध को राज्य के सामाजिक संदर्भ में दुर्लभतम से दुर्लभ अपराधों में से एक बताया है। जज ने यह फैसला सुनाते हुए कहा, यह अपराध न केवल पीड़ित के ख़िलाफ़ एक जुर्म है, बल्कि एक नैतिक और सामाजिक जुर्म भी है जो परिवार की पवित्रता और सांस्कृतिक मूल्यों की जड़ पर वार करता है।

13 अगस्त 2022 को किया था रेप

जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर अपनी चचेरी बहन के साथ नाहरलागुन में उनके किराए के मकान में 13 अगस्त 2022 को बलात्कार किया था। यह घटना तब हुई जब उनकी बड़ी बहन घर पर नहीं थी। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने पहले भी तीन बार नाहरलागुन वाले घर में और एक बार उनके गांव में उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश की थी। मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट के साथ साथ गवाहों के बयान और अपराधी के DNA नमूने भी सबूत के तौर पर कोर्ट में जमा कराए थे।

आरोपी की नरमी की अपील को कोर्ट ने किया खारिज

कोर्ट ने अपराधी द्वारा दायर नरमी की अपील को खारिज करते हुए यह फैसला लिया है कि आरोपी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 360 के तहत या परिवीक्षा अधिनियम के तहत कोई फायदा नहीं मिलेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को 'अरुणाचल प्रदेश पीड़ित मुआवजा योजना, 2011' के तहत पीड़िता को मुआवजा देने के आदेश भी दिए है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपराधी को उम्र कैद की सजा सुनाई गई और उस पर 20,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।

Published on:
09 Oct 2025 01:49 pm