
TMC political Crisis: तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे घमासान के बीच बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने चुप्पी ने तोड़ी है। कभी खुद को ममता बनर्जी की 'परछाई' बताने वाले चक्रवर्ती ने अब 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) से जुड़ने की अपनी मजबूरी साफ कर दी है। उन्होंने सीधे तौर पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि ममता बनर्जी इतनी डरी हुई हैं कि वह पार्टी की एक बैठक नहीं बुला पा रही हैं। चुनाव से पहले भी वह अपने क्षेत्र में एक भी मीटिंग नहीं कर पाई थीं।
अभिषेक बनर्जी द्वारा 20 बागी सांसदों को गद्दार कहे जाने पर पलटवार करते हुए उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि असली गद्दार कौन है? वह जो कार्यकर्ताओं को जेल भिजवाता है, उनका ध्यान नहीं रखता… या वह जो मुसीबत में उनका साथ छोड़ देता है? दीदी अब बूढी हो चुकी हैं। मैं दीदी की परछाई था। सब उनके साथ थे। सब जानते हैं अब दीदी को कार्य करने नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि TMC से हर कोई हमारे (नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) साथ आएगा। वे और कहां जा सकते हैं? उन सभी को पॉलिटिक्स में रहना होगा। गलतियों का सुधार करना होगा। हम अपनी पार्टी को ठीक करना चाहते हैं। इसलिए ये कदम उठाना पड़ा।
अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि चुनाव सिर्फ ममता बनर्जी ने नहीं लड़ा था, बल्कि पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिलकर चुनाव लड़ा था। उन्होंने सवाल उठाया कि जनता ने केवल ममता बनर्जी को नहीं, बल्कि पूरी पार्टी को वोट दिया था। पार्टी किसी एक व्यक्ति या एक परिवार की नहीं होती, बल्कि सभी की होती है। उन्होंने पूछा कि जब पार्टी सबकी है, तो इसे मिलकर क्यों नहीं चलाया गया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व बैठक बुलाने से डरता है। जनता किसी के नियंत्रण में नहीं होती और राजनीति हमेशा खुलकर, पारदर्शी और सीधे तरीके से की जानी चाहिए, न कि पर्दे के पीछे।