LPU के फाउंडर और AAP सांसद अशोक मित्तल ने BJP जॉइन कर ली। जानिए उनकी नेट वर्थ, ED रेड और 500 रुपये से 800 करोड़ तक का पूरा सफर।
आम आदमी पार्टी में अचानक एक बड़ा उलटफेर हुआ है। 'आप' के राज्यसभा सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक डॉ अशोक कुमार मित्तल सहित सात सांसदों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
बता दें कि कुछ ही दिनों पहले उनके ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने छापामारी की थी। इस छापे के बाद से ही राजनीतिक हलकों में उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें लग रही थीं, जो अब सच साबित हो गई हैं।
अशोक मित्तल की कहानी एक साधारण परिवार से शुरू होती है। उनके पिता बालदेव राज मित्तल ने साल 1961 में महज 500 रुपये उधार लेकर जालंधर में 'लवली स्वीट्स' नाम की छोटी सी दुकान खोली थी। उसी छोटी सी नींव पर आगे चलकर एक बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा हुआ।
अशोक मित्तल के पूरे ग्रुप की कुल संपत्ति करीब 800 करोड़ रुपये आंकी जाती है। उन्होंने ऑटोमोबाइल, मिठाई और शिक्षा जैसे कई कारोबारों में हाथ आजमाया।
10 सितंबर 1964 को जालंधर में जन्मे अशोक मित्तल ने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री ली। साल 2005 में उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की स्थापना की, जो आज भारत की सबसे बड़ी सिंगल-कैंपस यूनिवर्सिटी बन चुकी है।
इसमें 35,000 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं, जो देश के हर राज्य और 50 से ज्यादा देशों से आते हैं। जब उन्होंने यूनिवर्सिटी शुरू की थी, तब कई लोगों ने मजाक उड़ाया था कि अब मिठाई वाले भी डिग्री बांटेंगे। लेकिन मित्तल ने हार नहीं मानी। उनकी पत्नी रश्मि मित्तल यूनिवर्सिटी की को-चांसलर हैं। बेटे प्रथम मित्तल ने भी शिक्षा के क्षेत्र में कई नए संस्थान खड़े किए हैं।
2022 के पंजाब चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया और उनके सामने कोई उम्मीदवार नहीं था। हाल ही में AAP ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर भी बनाया था, जिसमें उन्होंने राघव चड्ढा की जगह ली थी। लेकिन ED की कार्रवाई के बाद पार्टी से उनका मोहभंग शुरू हो गया।
मित्तल सिर्फ एक नेता नहीं थे, वह पंजाब में पार्टी की साख और आर्थिक ताकत दोनों का प्रतीक थे। उनके जाने से AAP के लिए पंजाब में जमीन बनाए रखना और मुश्किल हो सकता है। जिस तरह एक-एक करके राज्यसभा के कई सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं, वह संकेत अच्छे नहीं हैं।