
Case regarding NEET student protest withdrawn: नीट परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर छात्र आंदोलन पर असम व बिहार सरकार ने पीछे हटने का फैसला लिया है। असम राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में 27 जुलाई को देर शाम एक प्रेस नोट जारी किया गया है। असम की बीजेपी सरकार ने साफ कहा है कि अब इन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। हिमंत सरकार ने कहा कि सारे दर्ज केसों को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब इन मामलोंम में कोई नया एक्शन नहीं होगा। राज्य सरकार ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल जो 13 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। उनकी भी रिहाई की प्रक्रिया तेजी से चलेगी।
वहीं, बिहार सरकार ने भी छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने का ऐलान कर दिया है। बिहार सरकार ने प्रेस नोट में बताया कि 27 जुलाई शाम 6 बजे से पहले तक बिहार राज्य के किसी भी हिस्से में इस विरोध प्रदर्शन में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध सरकार कोई भी दण्डात्मक, प्रतिशोधात्मक अथवा प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी। राज्य सरकार ने आगे कहा कि 26 जुलाई शाम 6 बजे से पहले जिन लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज हैं या कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उसे वापस लेने के लिये विधिक प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जायेगी।
कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि हमें गहरा सदमा लगा है कि सरकार अपने वादों को पूरा नहीं कर रही है। हम उम्मीद करते हैं कि कल, यानी मंगलवार तक हमारी मांगों पर लिखित आश्वासन मिले। अगर सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया और FIR तुरंत वापस नहीं ली गईं, तो हम दिल्ली में एक और धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
20 जुलाई को हमारी केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ यह सहमति बनी थी कि प्रदर्शनकारियों या आयोजकों के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की जाएगी न सिर्फ 20 जुलाई या उससे पहले दिल्ली में हुई घटनाओं के सिलसिले में, बल्कि देश भर में चल रहे प्रदर्शनों के संबंध में भी, खासकर उन राज्यों में जहां BJP की सहयोगी सरकारें हैं। यह भी तय हुआ था कि जो FIR पहले ही दर्ज हो चुकी हैं, उन्हें वापस ले लिया जाएगा। हालांकि, अब हम जो देख रहे हैं खासकर बंगाल, बिहार, असम और दिल्ली के कुछ हिस्सों में वह यह है कि कई छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, हिरासत में लिया गया है और उन पर FIR दर्ज की गई हैं।