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भूपेन बोरा ने कांग्रेस से क्यों वापस लिया इस्तीफा,आखिर क्या रही वजह

Resignation: असम कांग्रेस में इस्तीफे पर हुआ यू-टर्न। राहुल गांधी से बातचीत के बाद भूपेन बोरा ने वापस लिया इस्तीफा, बेहाली प्रकरण और माजुली मुद्दे पर थी नाराजगी।

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Feb 16, 2026
असम कांग्रेस संकट। ( फोटो: ANI)

Senior leader: कांग्रेस में एक ताजा नाटकीय घटनाक्रम हुआ है। असम कांग्रेस (Assam Congress News) में पिछले कुछ घंटों से चल रहा सियासी ड्रामा आखिरकार खत्म हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के भीतर मचे घमासान और इस्तीफे की खबरों के बीच बड़ी राहत की खबर आई है। पार्टी के दिग्गज नेता भूपेन बोरा (Bhupen Borah) ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। इस बात की पुष्टि असम कांग्रेस के प्रभारी जितेंद्र सिंह (Jitendra Singh) ने की है। बताया जा रहा है कि दिल्ली दरबार से दखल और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से लंबी बातचीत के बाद बोरा की नाराजगी दूर हो गई है। सोमवार को असम कांग्रेस के प्रभारी जितेंद्र सिंह ने मीडिया से मुखातिब होते हुए यह बात कही कि पार्टी के अंदर मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन अब सब कुछ ठीक कर लिया गया है। उन्होंने कहा, "भूपेन बोरा (Bhupen Borah) कांग्रेस परिवार के एक बेहद अहम और पुराने सदस्य हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया।"

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राहुल गांधी को बीच-बचाव करना पड़ा (Rahul Gandhi)

सूत्रों के मुताबिक, मामला इतना बढ़ गया था कि खुद राहुल गांधी को बीच-बचाव करना पड़ा। जितेंद्र सिंह ने बताया कि पार्टी नेतृत्व और राहुल गांधी ने भूपेन बोरा से लंबी चर्चा की, जिसके बाद उन्होंने अपना फैसला बदल लिया। सिंह ने कहा, "हमने आपसी बातचीत से मामले को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लिया है। मैं इस्तीफा वापस लेने के लिए भूपेन बोरा को धन्यवाद देता हूं।"

तो क्यों नाराज थे भूपेन बोरा? (Bhupen Borah)

भले ही मामला शांत हो गया हो, लेकिन इस इस्तीफे ने पार्टी के अंदरूनी कलह की पोल खोल दी है। भूपेन बोरा ने पत्रकारों से बातचीत में साफ संकेत दिया था कि उनकी नाराजगी 'बेहाली प्रकरण' (Behali episode) और 'माजुली यात्रा' (Majuli yatra) को लेकर थी। बोरा ने अपने इस्तीफे की वजहों पर खुलकर तो नहीं बोला, लेकिन इशारों में बहुत कुछ कह गए। उन्होंने कहा, "मैंने इस्तीफा क्यों दिया, यह बात सबको पता है। इसकी शुरुआत बेहाली से हुई थी।" उनकी नाराजगी इस बात को लेकर भी थी कि पार्टी माजुली यात्रा में किसे साथ रखना चाहती है, इस पर भी फैसला नहीं कर पा रही थी।

तीन दशक का साथ और दबाव की राजनीति

भूपेन बोरा पिछले करीब 30 सालों से कांग्रेस के वफादार सिपाही रहे हैं। ऐसे में उनका इस्तीफा पार्टी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, खासकर तब जब राज्य में सियासी माहौल गर्म है। बोरा ने पहले कहा था कि उन्होंने आलाकमान को इस्तीफा भेज दिया है और वक्त आने पर वे पूरी बात बताएंगे। लेकिन अब नेतृत्व के आश्वासन के बाद वे काम पर लौटने को तैयार हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि भूपेन बोरा की वापसी के बाद क्या असम कांग्रेस में गुटबाजी पूरी तरह खत्म हो पाएगी? क्या माजुली यात्रा और आगामी कार्यक्रमों में उन नेताओं को जगह मिलेगी, जिनका विरोध बोरा कर रहे थे? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हाईकमान ने बोरा को कुछ ठोस आश्वासन दिए हैं, जिनका असर आने वाले दिनों में संगठन के फैसलों में दिख सकता है।

माजुली यात्रा पर सस्पेंस (Majuli Yatra)

इस पूरे विवाद का एक बड़ा पहलू 'माजुली यात्रा' है। बोरा का कहना था कि अगर पार्टी यह तय नहीं कर पा रही कि यात्रा में कौन साथ चलेगा, तो भविष्य अंधकारमय है। यह इशारा पार्टी के भीतर कुछ ऐसे नेताओं की ओर था, जिनसे बोरा असहज महसूस कर रहे थे। अब इस्तीफे की वापसी के बाद, माजुली यात्रा का स्वरूप क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी। ( इनपुट : ANI)

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