Congress Party Assam Polls 2026: असम विधानसभा में विपक्ष के नेता और नाजिरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार देबब्रता सैकिया ने कहा कि मैं एग्जिट पोल पर ज्यादा ध्यान नहीं देता, लेकिन इस बार आम आदमी ने भाजपा को वोट नहीं दिया। मैं यह जानता हूं क्योंकि चुनाव मुद्दों पर लड़े जाते हैं।
Assam LoP Debabrata Saikia Exit Poll Rejection: पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर बुधवार को एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आ गए है। पोल अनुसार, असम में एनडीए को बहुमत मिलता नजर आ रहा है। इसी बीच असम विधानसभा में विपक्ष के नेता और नाजिरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार देबब्रता सैकिया ने कहा कि आम लोगों ने भाजपा को वोट नहीं दिया है, क्योंकि एग्जिट पोल ने पूर्वोत्तर राज्य में एनडीए सरकार के लिए एक और कार्यकाल का अनुमान लगाया है।
मीडिया से बात करते हुए सैकिया ने भाजपा पर एक दशक पहले राज्य से किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। एग्जिट पोल पर ज्यादा ध्यान न देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा असम के लिए अच्छे दिन लाने के बजाय बुरे दिन लेकर आई है।
उन्होंने कहा कि मैं एग्जिट पोल पर ज्यादा ध्यान नहीं देता, लेकिन इस बार आम आदमी ने भाजपा को वोट नहीं दिया। मैं यह जानता हूं क्योंकि चुनाव मुद्दों पर लड़े जाते हैं। भाजपा ने हमें 10 साल का विजन डॉक्यूमेंट दिया था, लेकिन उसके एक भी वादे पूरे नहीं हुए। असम में अच्छे दिनों की जगह बुरे दिन आ गए। असम में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है, जहां 33 लाख से अधिक युवा बेरोजगार हैं। इस बारे में कुछ नहीं किया गया। इसी वजह से बदलाव की जरूरत थी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। पहले से कहीं ज्यादा भ्रष्टाचार है और किए गए सारे वादे पूरे नहीं हुए हैं।
सैकिया ने नागरिकता संशोधन अधिनियम, महंगाई, छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा, बेरोजगारी, जुबीन गर्ग की मृत्यु और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा ने असम की जनता से किए गए किसी भी वादे को पूरा नहीं किया है। उन्होंने चाय बागान श्रमिकों से भाजपा द्वारा किए गए कथित अधूरे वादों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें दैनिक मजदूरी में वृद्धि भी शामिल है।
उन्होंने आगे कहा कि चाय बागान श्रमिकों के संबंध में, भाजपा ने 2014 में 350 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी का वादा किया था। यह अभी तक पूरा नहीं हुआ है; यह अभी भी 250 रुपये पर ही है। इसलिए, इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए, असम के लोगों के पास भाजपा को फिर से चुनने का कोई कारण नहीं है। यहां तक कि ओरुनोदोई योजना के तहत मिलने वाले 1250 रुपये भी सभी तक नहीं पहुंचे। जिन्हें यह राशि मिलनी चाहिए थी, उन्हें इससे वंचित रखा गया। और चाय बागानों में, इन सब का कोई खास असर नहीं पड़ा है।