आगामी यूपी, गुजरात, पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस दलित मुस्लिम समीकरण बनाने में जुटी हुई है। कांग्रेस का मानना है कि अगर इन राज्यों में पार्टी दलित व मुस्लिमों को साध लेती है तो वह निर्णायक स्थिति में पहुंच जाएगी।
यूपी, गुजरात और पंजाब समेत 5 राज्यों में अगले साल चुनाव होने वाले हैं। गुजरात, यूपी और पंजाब में दलित अच्छे तादाद में है। वहीं, यूपी में मुस्लमानों की संख्या भी 16 फीसदी के करीब है। ऐसे में कांग्रेस (Congress) यहां दलितों व मुसलमानों को साधने के लिए रणनीति में बनाने में जुटी हुई है। कांग्रेस एक देशव्यापी आउटरीच प्रोग्राम की योजना बना रही है। इसका मकसद पार्टी के अनुसूचित जाति (SC) और अल्पसंख्यक विभागों की साझा पहलों के ज़रिए दलितों और अल्पसंख्यकों को एक साझा मंच पर लाना है। दोनों समुदायों को लेकर कांग्रेस की पहली बड़ी बैठक 6 जून को होगी।
AICC अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि इस मौजूदा वक्त में दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। उन्हें बड़े पैमाने पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। इसलिए, हमें लगता है कि इन दोनों समुदायों के लोगों को एक साथ लाना और उनके मुद्दों पर बात करना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि दोनों विभागों का पहला संयुक्त सम्मेलन 6 जून को होगा। इसमें दोनों समुदायों के कांग्रेस पदाधिकारी, बल्कि सार्वजनिक बुद्धिजीवी, नागरिक समाज के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता और कलाकार साथ आएंगे और दलितों व अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद इसी तरह का सम्मेलन देश भर में आयोजित किए जाएंगे।
AICC अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि BJP शासन के तहत दोनों समुदायों के सामने आने वाले मुद्दों की जड़ें एक ही हैं, और इसलिए उनके समाधान भी एक जैसे ही होने चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समुदाय धर्म के नाम पर उत्पीड़न का सामना कर रहा है, जबकि दूसरा जाति के नाम पर उत्पीड़न का सामना कर रहा है। दोनों समुदाय देश के मूल निवासी हैं। दोनों समुदायों को नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में अवसरों से वंचित किया गया है। इन सम्मेलनों में दोनों समुदायों की आर्थिक और सामाजिक स्थितियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए रोडमैप तैयार किया जाएगा।
पार्टी का मनाना है कि यूपी, गुजरात और पंजाब में दलितों व अल्पसंख्यकों की आबादी कुल मिलाकर 35 से 40 फीसदी हिस्सा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी यदि इन समुदायों के वोट एक साथ ला पाती है तो वह निर्णायक स्थिति में पहुंच जाएगी। पार्टी के एक नेता ने कहा कि दलित मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (BSP) का कोई विकल्प तलाश रहे हैं। पंजाब में भी, अगर दलित और अल्पसंख्यक एक साथ वोट करते हैं, तो कांग्रेस मज़बूत स्थिति में होगी। गुजरात में भी कांग्रेस को दलितों का साथ मिला तो चुनाव में स्थिति बदल सकती है।
कांग्रेस का मानना है कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी के संविधान बचाओ नारे ने ही बीजेपी को पूर्ण बहुमत के आंकड़े से रोक दिया। इसका असर यूपी में पड़ा। अखिलेश यादव के PDA की रणनीति और कांग्रेस के नारे के चलते राज्य में बीजेपी की सीटें घटकर 33 रह गई, जो 2019 की 62 सीटों से कम थीं। पार्टी नेताओं का तर्क है कि राज्य में विपक्षी गठबंधन के प्रदर्शन में दलितों के समर्थन ने अहम भूमिका निभाई।
उत्तर प्रदेश में दलितों की आबादी सबसे अधिक है—लगभग 4.13 करोड़, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 20.7% है। जाब में दलित आबादी का प्रतिशत सर्वाधिक 31.9% है। गुजरात में दलित आबादी 6.74% है। उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की आबादी 19 फीसदी है, जबकि गुजरात में 9 फीसदी और पंजाब में लगभग 2 फीसदी है।