
पश्चिम बंगाल में चुनावी विवाद फिर गरमाया है। दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति दर्ज कराने की खबरों के बीच राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने विपक्ष को सीधा ललकारा है। उन्होंने साफ कहा कि विपक्ष के पास कोई सबूत नहीं है और उनकी बात कोई सुनने वाला भी नहीं।
दिलीप घोष ने कहा कि एसआईआर (SIR) यानी 'मतदाता सूची में विशेष गहन संशोधन' का मुद्दा अदालत में भी उठा था। लोग कोर्ट तक गए थे। लेकिन नतीजा क्या निकला? कुछ भी नहीं। अदालत ने कोई बड़ा बदलाव नहीं किया।
घोष ने कहा कि विपक्ष सिर्फ शोर मचा रहा है। असल में उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं कि कहां गड़बड़ी हुई। मंत्री ने साफ भाषा में बताया कि अगर किसी नागरिक का नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हट गया है तो डरने की जरूरत नहीं। जरूरी कागजात जमा करो। नाम दोबारा जुड़ जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रक्रिया आसान है। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
घोष ने उपचुनाव को लेकर भी विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने पूछा कि जो पार्टियां उपचुनाव में उम्मीदवार तक नहीं खड़ा कर पातीं, उनकी बात कौन सुनेगा? ऐसे दल सिर्फ आरोप लगाते हैं। असल मैदान में उनका कोई वजूद नहीं दिखता। बंगाल की जनता अब इन खोखली बातों से ऊब चुकी है।
बता दें कि दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति की खबरों के बावजूद घोष ने चुनाव आयोग के फैसलों पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया पारदर्शी है। कोई भी नागरिक अपना हक आसानी से हासिल कर सकता है। विपक्ष को सबूत पेश करने चाहिए, सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा।
मंत्री दिलीप घोष ने इस बीच बंगाल में अडानी ग्रुप के प्रोजेक्ट पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा- अडानी ग्रुप यहां 2,000 बेड का अस्पताल बनाने जा रहा है और आज इसका भूमि पूजन समारोह हो रहा है। इसमें से 1,000 बेड गरीबों के लिए मुफ्त होंगे।
उन्होंने आगे कहा- यह काम अब शुरू हो रहा है और वे जिस भी तरह से काम करना चाहें, हम उनकी मदद करने के लिए तैयार हैं। सभी उद्योगपति और बिजनेस ग्रुप आ रहे हैं और उन्हें धीरे-धीरे जमीन भी दी जाएगी। साथ ही, उन कंपनियों से जमीन वापस ले ली जाएगी जिन्होंने पहले जमीन तो ली थी लेकिन कोई काम शुरू नहीं कर पाईं।