भबानिपुर स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर बंगाल में सियासी तनाव बढ़ गया है। ममता बनर्जी ने EVM गड़बड़ी के आरोप लगाए, जबकि सुवेंदु अधिकारी ने पूरी प्रक्रिया को सख्त निगरानी और पारदर्शी बताया।
West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल की राजनीति में भबानिपुर स्ट्रॉन्ग रूम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने दावा किया है कि यहां सख्त निगरानी रखी जा रही है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) पर भी नजर रखी जा रही है। उनका कहना है कि किसी भी तरह की अनियमितता को रोकने के लिए पूरी व्यवस्था को कड़ी निगरानी में रखा गया है। अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उनके एजेंट को भी वहां मौजूद रखा गया है ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
इस पूरे विवाद की शुरुआत उस समय और तेज हो गई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते दिन देर रात भबानिपुर स्थित स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा किया। उन्होंने दावा किया कि कई जगहों से EVM से जुड़ी गड़बड़ियों की शिकायतें मिल रही हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ममता बनर्जी ने कहा कि जब उन्होंने TV पर CCTV फुटेज देखी तो उन्हें खुद मौके पर जाकर स्थिति देखने की जरूरत महसूस हुई। उनका यह भी कहना था कि शुरुआत में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उन्हें अंदर जाने से रोका, लेकिन चुनाव नियमों के अनुसार उम्मीदवार और उनके एजेंट को अनुमति होती है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य के कई हिस्सों से EVM से छेड़छाड़ की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि अगर इस तरह की कोई भी कोशिश होती है तो TMC इसका डटकर मुकाबला करेगी। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पार्टी अंतिम समय तक लड़ाई लड़ेगी।
दूसरी ओर, सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के दौरे और आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार चल रही है और स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी सख्ती से की जा रही है। उनके अनुसार, चुनावी एजेंट की मौजूदगी का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो।
भबानिपुर का यह मामला अब सिर्फ एक स्ट्रॉन्ग रूम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ TMC जहां EVM सुरक्षा पर सवाल उठा रही है, वहीं विपक्ष पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बता रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में तनाव और बढ़ा दिया है।