
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में ट्रांसजेंडर उम्मीदवार प्रिया सिन्हा का भी नामांकन रद्द हो गया है। इससे पहले, जेजेपी कैंडिडेट वीणा मानवी का नामांकन चुनाव आयोग ने रद्द कर दिया था।
नॉमिनेशन रद्द होने के बाद प्रिया ने बताया कि लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा था, लेकिन कागजी प्रक्रिया में छोटी सी गलती ने सब कुछ बदल दिया। अब वे हाईकोर्ट और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगी।
प्रिया सिन्हा ने मीडिया से बात करते हुए कहा- मेरा नामांकन रिजेक्ट हो गया है। डिक्लेरेशन फॉर्म पर एक सिग्नेचर छूट गया था। मैंने लोगों का जो समर्थन देखा, वो बहुत था। मैं हाईकोर्ट जाऊंगी, जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी। मुझे न्याय चाहिए।
प्रिया ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया था। इलाके में उनकी चर्चा जोरों पर थी। ट्रांसजेंडर समुदाय से आने वाली प्रिया पहले से ही सामाजिक कामों के लिए जानी जाती हैं।
प्रिय अक्सर गरीबों की मदद, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर लगातार बोलती रही हैं। नामांकन भरते समय आसपास के लोग उन्हें समर्थन देने पहुंचे थे। लेकिन रिटर्निंग अधिकारी ने फॉर्म की जांच में एक सिग्नेचर न होने की बात कही और नामांकन खारिज कर दिया। हालांकि, प्रिया ने इसे तकनीकी गलती बताया। उन्होंने कहा कि बाकी सारी प्रक्रिया पूरी थी, सिर्फ एक जगह साइन रह गया।
बांकीपुर सीट पर इस उपचुनाव की चर्चा पहले से ही गरमा रही है। बीजेपी, जन सुराज और राजद के बीच मुख्य मुकाबला है। प्रिया के नामांकन ने नया रंग जोड़ दिया था। लेकिन अब उन्हें निराश होना पड़ा है।
प्रिया ने कहा कि यह सिर्फ उनका व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है। यह पूरे समुदाय के हक का सवाल है। अगर छोटी सी गलती पर नामांकन रद्द होगा तो गरीब और कमजोर वर्ग के लोग कैसे लड़ पाएंगे।
प्रिया अब हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाली हैं। उनके समर्थक कहते हैं कि अगर जरूरी हुआ तो वे सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।
चुनाव आयोग के नियमों में नामांकन फॉर्म की सख्ती है, लेकिन कई बार छोटी गलतियों को सुधारने का मौका भी दिया जाता है। प्रिया का पक्ष यही है कि फॉर्म में बाकी सब सही था, सिर्फ एक साइन की वजह से पूरा प्रयास बेकार न हो।