Bihar Cabinet Expansion: बिहार की नई सरकार बनने के महज कुछ हफ्तों बाद कैबिनेट विस्तार की तैयारी जोरों पर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी रविवार को दिल्ली पहुंचे और गृह मंत्री अमित शाह समेत एनडीए के बड़े नेताओं से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में नए मंत्रियों के नाम और विभागों के बंटवारे पर अहम चर्चा हुई है।
बिहार के सीएम सम्राट चौधरी की अमित शाह से मुलाकात को राजनीतिक गलियारों में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आधिकारिक तौर पर इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन अंदरूनी सूत्र बता रहे हैं कि कैबिनेट विस्तार की लिस्ट पर शाह की सहमति लेना मुख्य मुद्दा था।
मौजूदा समय में बिहार कैबिनेट सिर्फ तीन सदस्यों वाली है, जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव शामिल हैं।
15 अप्रैल को शपथ लेने के बाद अभी तक विस्तार नहीं हो सका है, जिसकी वजह से कामकाज पर असर पड़ रहा है। ऐसे में विस्तार की मांग लगातार जोर पकड़ रही थी।
सम्राट चौधरी ने खुद एक्स पर पोस्ट कर बताया- देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी से मुलाकात हुई। सुरक्षा, सुशासन और बिहार के समग्र विकास से जुड़े कई मुद्दों पर मार्गदर्शन मिला।
बैठक में सिर्फ कैबिनेट विस्तार ही नहीं, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार पर लगाम और प्रशासन को और बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से बात हुई।
मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, नित्यानंद राय, जीतन राम मांझी और लालन सिंह जैसे नेताओं से भी अलग-अलग मुलाकातें कीं।
दिल्ली जाने से एक दिन पहले शनिवार को सम्राट चौधरी पटना में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिले थे। दोनों नेताओं के बीच कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चा हुई, ऐसा सूत्रों का कहना है। यह मुलाकात इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि नीतीश कुमार की जद(यू) से दो उपमुख्यमंत्री कैबिनेट में हैं।
यह अब तक साफ नहीं है कि कैबिनेट विस्तार कब होगा, लेकिन दिल्ली की इन बैठकों के बाद जल्द फैसला होने के आसार हैं। सूत्र बता रहे हैं कि नए चेहरों को मौका देने और सभी सहयोगी दलों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने पर जोर रहेगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विस्तार न सिर्फ सरकार को मजबूत बनाएगा बल्कि विकास योजनाओं को तेज गति देने में भी मदद करेगा। बिहार में अभी कई बड़े विभागों के पास पूर्ण मंत्री नहीं हैं, जिससे फैसले लेने में देरी हो रही है।