Bihar Election 2025: बिहार चुनाव का पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद, अब बारी है दूसरे और अंतिम चरण की जो 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर 11 नवंबर को होने जा रहा है।
Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का शोर अब थमता दिख रहा है। लेकिन राजनीति में बिहार के सीमांचल की सीटें हॉटस्पॉट बनी हुई हैं। कारण है मुस्लिम पॉपुलेशन जिनकी सीमांचल की सीटों पर 40 से 70 फीसदी आबादी है। यही वजह है कि मुस्लिम और यादव समीकरण के कारण लालू यादव की आरजेडी और कांग्रेस के लिए सीमांचल की 24 विधानसभा सीटें पारंपरिक रूप से एक मजबूत गढ़ रही हैं। लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में ओवैसी की AIMIM ने आरजेडी और कांग्रेस की सीमांचल की सीटों पर चलने वाली दादागिरी को चोट पहुंचाकर 5 सीटों पर अपना कब्जा जमा लिया था और आरजेडी और कांग्रेस के महागठबंधन के समीकरण को ध्वस्त कर दिया था। इस बार भी AIMIM 15 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
बिहार का सीमांचल क्षेत्र को पूर्णिया प्रमंडल के नाम से भी जाना जाता है। इस क्षेत्र के अंतर्गत बिहार के चार जिले किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया आते हैं, जहां पर किशनगंज में 4, अररिया में 6, कटिहार में 7 और पूर्णिया में 7 सीटें हैं। यह इलाका बांग्लादेश और नेपाल से सटा होने के कारण राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है। सीमांचल की इन 24 सीटों पर राजनीतिक पार्टियों की पैनी नजर है, यही कारण है कि योगी आदित्यनाथ, अमित शाह और पीएम मोदी जैसे नेता लगातार प्रचार कर रहे हैं।
पिछली बार 2020 में ओवैसी ने कांग्रेस और RJD का सीमांचल की सीटों का सुरक्षा कवच तोड़कर 5 विधानसभा सीटें अपने नाम की थीं। इस बार भी ओवैसी 15 सीटों के साथ मैदान में उतरे हैं। सीमांचल के इन चार जिलों (किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया) में किसी भी दल के लिए राजनीति बिना मुस्लिम वोटों के अधूरी मानी जाती है। इसी कारण ओवैसी सीमांचल की 15 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें किशनगंज और पूर्णिया की चार-चार सीटें, कटिहार की पाँच सीटें और अररिया की दो सीटें शामिल हैं। ओवैसी अक्सर कांग्रेस और आरजेडी पर मुस्लिमों को वोट बैंक के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाते रहे हैं।
इस बार महिलाओं और फर्स्ट टाइम वोटरों की संख्या काफी अधिक होने के कारण उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पहले चरण में भी महिलाओं की भागीदारी 65 फीसदी से ज्यादा की थी, जो कि पुरुषों के मुकाबले ज्यादा है। जिसको देखते हुए सभी पार्टियों ने महिला वोटरों को साधने का काम शुरू किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सरकार की महिला सशक्तिकरण की योजनाओं को गिनाते हुए नजर आए, तो बिहार विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव "माई बहिन योजना" के तहत महिलाओं के खातों में सालाना 30 हजार रुपये देने का वादा जोरों-शोरों से दोहराते हुए नजर आए।