बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर सियासी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। एनडीए और महागठबंधन दोनों के पास पर्याप्त संख्या नहीं है। Asaduddin Owaisi की AIMIM के रुख से नतीजे तय हो सकते हैं।
Bihar Politics: बिहार की राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव होना है। इससे पहले सियासी दांव-पेच शुरू हो गए हैं। माना जा रहा है कि पांच में से चार सीटें एनडीए के खाते में जा रही हैं; इन सीटों पर निर्विरोध भी चुनाव हो सकता है। लेकिन जो सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह पांचवीं सीट है। इस सीट पर नंबर गेम किसी भी गठबंधन के पक्ष में नहीं है। इसलिए NDA और महागठबंधन असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के भरोसे पर हैं।
दरअसल, पांचवीं सीट के लिए बीजेपी और जेडीयू के पास विधायकों की संख्या कम हो जाएगी। दोनों पार्टियों के पास बस महज 10 विधायकों के वोट बच जाएंगे। लेकिन यदि पूरे NDA की बात की जाए तो टोटल वोट 38 हो जाएंगे। इसके बाद भी इस सीट को जीतने के लिए NDA को तीन वोटों की आवश्यकता होगी।
दूसरी तरफ महागठबंधन की बात करें तो राजद सबसे आगे है। हालांकि राजद और विपक्षी दल मिलकर भी अपने प्रत्याशी को राज्यसभा नहीं पहुंचा सकते हैं। महागठबंधन के पास 35 वोट हैं, ऐसे में इस गठबंधन को भी 6 वोटों की आवश्यकता होगी। यदि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी महागठबंधन को सपोर्ट करती है तब 40 हो जाते हैं, लेकिन इसके बाद भी एक वोट की आवश्यकता होगी।
अनुमान लगाया जा रहा है कि महागठबंधन के पक्ष में BSP के एकमात्र विधायक के समर्थन की भी आवश्यकता होगी। इसके बाद कुल 41 वोट होंगे।
राज्यसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बड़ी चाल चली है। पार्टी ने अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर दिया है। हालांकि ओवैसी के पास महज 5 वोट हैं। ऐसे में वह अपने प्रत्याशी को राज्यसभा नहीं पहुंचा सकता है, लेकिन उसने दोनों गठबंधन को चिंतित कर दिया है।
बता दें कि राज्यसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारने के ऐलान के बाद महागठबंधन चिंतित जरूर होगा। माना जा रहा है कि महागठबंधन को AIMIM सपोर्ट कर सकती है, लेकिन एक शर्त है। वह है यदि महागठबंधन राज्यसभा चुनाव के लिए किसी मुस्लिम प्रत्याशी को उतारे, क्योंकि AIMIM की सियासी राजनीति मुसलमानों के इर्द-गिर्द ही घूमती है। ऐसे में गठबंधन को सपोर्ट करना ओवैसी की पार्टी के लिए मजबूरी बन सकता है।
साथ ही यह भी हो सकता है कि AIMIM ने सोच लिया है कि न खेलेंगे और न खेलने देंगे। लेकिन खेल जरूर बिगाड़ेंगे। वोटिंग में AIMIM भाग नहीं लेगा तो संख्या बल के आधार पर एनडीए की जीत हो जाएगी और महागठबंधन को हार का सामना करना पड़ सकता है।
प्रदेश में सियासी अटकलें लगाई जा रही हैं। यदि राजद किसी मुस्लिम नेता को राज्यसभा पहुंचाएगी, उसमें सबसे पहले अब्दुल बारी सिद्दीकी का नाम है। वे लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते हैं और संगठन में उनका अनुभव बड़ा माना जाता है। हालांकि, अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व, खासकर तेजस्वी यादव की रणनीति पर निर्भर करेगा। सामाजिक समीकरण और राजनीतिक संदेश को देखते हुए, राजद उन्हें ऊपरी सदन में भेजकर अनुभवी चेहरा आगे कर सकती है।