20 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

परिसीमन ने बदल दिया खेल! असम में BJP मजबूत, कांग्रेस कमजोर, क्या प्रियंका खत्म करेंगी 10 साल का वनवास?

Assam Politics: असम में परिसीमन के बाद 126 सीटें हैं, लेकिन कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ है। इससे पहले प्रदेश में मुस्लिम बहुल सीटें करीब 35 थीं, लेकिन परिसीमन के बाद यह 22 ही रह गई हैं।

3 min read
Google source verification

भारत

image

Ashib Khan

Feb 20, 2026

Assam Assembly Election 2026, Assam politics, Delimitation impact in Assam, Congress crisis in Assam,

प्रियंका गांधी ने चुनावी अभियान किया तेज (Photo-IANS)

Assam Assembly Election 2026: असम में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले सियासी सरगर्मी तेज है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में शामिल होंगे। प्रदेश में बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं कांग्रेस अपने 10 साल के वनवास को खत्म करने के लिए प्रयास कर रही है। इसके लिए प्रियंका गांधी को प्रदेश की कमान दी गई है।

कांग्रेस को हुआ नुकसान

असम में परिसीमन के बाद 126 सीटें हैं, लेकिन कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ है। इससे पहले प्रदेश में मुस्लिम बहुल सीटें करीब 35 थीं, लेकिन परिसीमन के बाद यह 22 ही रह गई हैं। बताया जाता है कि इन सीटों पर कांग्रेस का वर्चस्व था। वहीं एससी रिजर्व सीटें 8 से बढ़कर 9 और एसटी की 16 से बढ़कर 19 हो गई हैं। 

कांग्रेस के सामने क्या मुश्किलें हैं?

असम विधानसभा चुनाव 2021 में करीब 31 मुस्लिम विधायक जीतकर विधानसभा में गए थे, जो कि अब परिसीमन के बाद करीब दो दर्जन ही रह गए हैं। बताया जाता है कि इन सीटों पर कांग्रेस की पकड़ अच्छी थी। एक तरफ जहां मुस्लिम बहुल सीटें कम हुई है, तो वहीं दूसरी तरफ 10 हिंदू सीटों की बढ़ोतरी हुई है। 

ऐसे में कांग्रेस को यदि प्रदेश में सरकार बनानी है तो मुस्लिम बहुल सीटों के अलावा अन्य सीटों को भी जीतना होगा। इसके लिए पार्टी ने तैयारी भी तेज कर दी है। गुरुवार को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी अपने दो दिवसीय दौरे के लिए पहुंची। हिंदू वोटरों को अपनी तरफ करने के लिए प्रियंका ने चुनावी अभियान की शुरुआत नीलाचल पहाड़ी स्थित शक्तिपीठ मां कामाख्या देवी मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ की। 

प्रियंका के सामने क्या है चुनौती?

असम में कांग्रेस के वनवास को खत्म करने के लिए प्रियंका गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी में गुटबाजी को रोकना है। हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा ने इस्तीफा दिया था और अब वे बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। भूपेन बोरा को मनाने के लिए आलाकमान ने भी पहल की थी, लेकिन वे नहीं माने। अब प्रदेश में भूपेन बोरा और हिमंत बिस्व सरमा की जोड़ी से लड़ने की भी चुनौती होगी। बता दें कि पहले बोरा और सरमा दोनों कांग्रेस में भी एक साथ रहे हैं। 

कांग्रेस का होगा नंबर गेम खराब

विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का जाना कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। इससे पार्टी का नंबर गेम भी खराब हो सकता है क्योंकि भूपेन बोरा के बाद राशिद मंडल ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और अखिल गोगोई की रायजोर दल का दामन थाम लिया है। मंडल गोलपाड़ा पश्चिम विधानसभा से तीन बार विधायक रह चुके हैं और आसपास के इलाकों में मजबूत पकड़ मानी जाती है। 

वहीं बताया जा रहा है कि भूपेन बोरा के साथ कई अन्य नेता भी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। इसको लेकर सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने भी दावा किया है कि विधानसभा चुनाव से पहले और नेता भी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। 

इन दो पार्टियों से पार पाना होगा

प्रदेश में भले ही 27 प्रतिशत मुस्लिम वोट बैंक हो, लेकिन कांग्रेस को मुस्लिम बहुल इलाके में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF और अखिल गोगोई की रायजोर दल से पार पाना होगा। इन दोनों ही पार्टियों की भी पकड़ मुस्लिम वोट बैंक पर मानी जाती है और इनकी राजनीति भी मुसलमानों के इर्द-गिर्द घूमती है। 

यही वजह है कि विधानसभा चुनाव 2021 में कांग्रेस ने बदरुद्दीन की पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस विधानसभा चुनाव में दोनों ही पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में मुस्लिम वोटरों का बिखराव होना भी तय माना जा रहा है। इससे बीजेपी को फायदा हो सकता है।