बिहार के शेखपुरा जिले के जमींदार सूर्यमणि सिंह को दहेज में मिले हाथी की मौत हो गई। अनारकली नाम से मशहूर इस हथिनी का सूर्यमणि सिंह ने 46 साल तक अपने बच्चे की तरह ख्याल रखा। अनारकली सूर्यमणि सिंह के साथ-साथ शेखपुरा की शान में शामिल थी।
दहेज में कार, बाइक, जेवरात, महंगे उपहार मिलना सामान्य बात है। लेकिन आज से 40-50 साल पहले दहेज में हाथी, घोड़े भी मिला करते थे। जिनका सक्षम परिवार अपने बच्चे की तरह ख्याल रखा करते थे। आज बिहार के शेखपुरा जिले में दहेज में मिली एक हथिनी की मौत हो गई। अनारकली के नाम से मशहूर इस हथिनी को शेखपुरा के जमींदार सूर्यमणि सिंह को उनकी शादी के समय ससुर ने गिफ्ट में दी थी।
1978 में दहेज में मिली इस हथिनी का सूर्यमणि सिंह ने 46 साल तक अपने बच्चे की तरह ख्याल रखा। आज उसकी मौत के बाद सम्मानजनक विदाई भी दी। अनारकली की मौत के बाद उसे दुल्हन की तरह सजाया गया। फिर क्रेन की मदद से उसे उसके हाथीखाना के पास गड्ढ़ा खोदकर दफनाया गया। सालों तक अनारकली शेखपुरा के बरबीघा प्रखंड अंतर्गत केवटी पंचायत के मिल्कीचक गांव की पहचान हुआ करती थी। आज उसकी मौत से पूरे गांव में मातम छाया है।
बताया गया कि अनारकली रविवार को जैसे बैठी थी उसी पॉजिशन में उसकी मौत हो गई। गांव के लोगों ने बताया कि सूर्यमणि सिंह अपने पिता कामेश्वरी सिंह के इकलौते बेटे थे। 200 बीघा जमीन के अकेले वारिस सूर्यमणि सिंह ने मेहूस गांव में कॉलेज, पावर ग्रीड , हाई स्कूल और सरकारी हॉस्पिटल के लिए अपनी जमीन सरकार को दान में दी थी।
सूर्यमणि सिंह के ससुर भी लखीसराय जिले के एक जमींदार थे। वो 400 बीघा जमीन के मालिक थे। उनकी इच्छा थी कि बेटी की शादी में वो दामाद को हाथी गिफ्ट करेंगे। इसी इच्छा के तहत 1978 में उन्होंने अपने दामाद सूर्यमणि सिंह को 10 हजार रुपए में खरीदकर हाथी गिफ्ट किया था। मालूम हो कि हाथी सबसे बड़ा जीव है। एक हाथी की औसत आयु 50 से 70 साल होती है।