
Charles Sobraj Fan Caught in Raipur : तीन दिन के अंदर पुलिस ने जिस शख्स को भुवनेश्वर से दबोचा, उसकी कहानी सुनकर खुद जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। नाम है बिंगसन जॉन, उम्र 69 साल और शौक ऐसा कि पिछले 36 सालों से देश के अलग-अलग राज्यों में फाइव स्टार होटलों में ठहरना, जमकर ऐश करना, और बिल आते ही चुपचाप निकल जाना। पूछताछ में जो बात सामने आई वो और भी दिलचस्प है, इस शख्स ने अपनी पूरी जिंदगी उस आदमी की तरह जीने की कोशिश की जिसे दुनिया ‘बिकिनी किलर’ के नाम से जानती है, यानी चार्ल्स शोभराज ।
रायपुर के एक फाइव स्टार होटल में 27 जून को जो हुआ, वो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं। जॉन दो दिन तक होटल में रुका, स्टाफ से घुलमिल गया और फिर ऑफिस के काम का बहाना बनाकर एक लैपटॉप किराए पर मंगवा लिया। कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये। लैपटॉप हाथ में आते ही जॉन ने होटल से फटाफट चेकआउट किया और लैपटॉप संग चंपत हो गया। पीछे छूटा 63,755 रुपये का बिल जो उसने भरा ही नहीं।
होटल मैनेजमेंट ने जब शिकायत दर्ज कराई तो एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और पुलिस एक्टिव हुई। चेक इन के वक्त दिए गए पहचान पत्र और मोबाइल नंबर की बारीकी से जांच हुई, जिसके बाद टेक्निकल सर्विलांस के जरिए पुलिस की टीम सीधा भुवनेश्वर पहुंची और वहीं से जॉन को गिरफ्तार कर लिया गया। उससे लैपटॉप भी बरामद हो गया।
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो जॉन ने जो बताया उसने पूरे थाने को चौंका दिया। तमिलनाडु के रहने वाले इस शख्स ने कबूल किया कि उसने अपनी पूरी जिंदगी चार्ल्स शोभराज से प्रेरित होकर जी है। वह चार्ल्स की नकल करते हुए ऐसे अपराध करता था। शोभराज की तरह ही जॉन भी अलग-अलग पहचान बनाकर होटलों में घुसता था, कभी विदेशी टूर गाइड बनकर, कभी अंग्रेजी टीचर, तो कभी योगा इंस्ट्रक्टर। मकसद एक ही, होटल स्टाफ का भरोसा जीतना और फिर उनकी मेहमाननवाजी का पूरा फायदा उठाकर बिना पैसे दिए निकल जाना।
पुलिस के मुताबिक जॉन ने खुद बताया कि 1990 से अब तक उसने 10 से ज्यादा राज्यों के करीब 300 होटलों को अपना निशाना बनाया। यानी औसतन हर महीने कहीं न कहीं ये खेल दोहराया गया और तीन दशक से ज्यादा वक्त तक कोई उसे ठीक से पकड़ नहीं पाया।
चार्ल्स सोभराज को दुनिया ‘बिकिनी किल’ के नाम से जानती है, और वो अपराध की दुनिया के सबसे खतरनाक और चालाक अपराधियों में गिना जाता है। भारतीय पिता और वियतनामी मां की संतान सोभराज 1970 के दशक में एशिया की मशहूर ‘हिप्पी ट्रेल’ पर घूमने वाले विदेशी बैकपैकर्स को अपना शिकार बनाता था। जांच एजेंसियों ने उसे थाईलैंड, नेपाल और भारत में 20 से ज्यादा हत्याओं के मामलों से जोड़ा था। तरीका हमेशा एक जैसा, पहले दोस्ती, फिर नशीला पदार्थ देकर बेहोश करना, पहचान और कीमती सामान चुराना, और कई मामलों में मौत के घाट उतार देना। उसकी शातिर चालें और बार बार पुलिस को चकमा देने की काबिलियत ने उसे इतना मशहूर कर दिया कि उस पर किताबें लिखी गईं, डॉक्यूमेंट्री बनी, और नेटफ्लिक्स ने भी उसकी जिंदगी पर 'द सर्पेंट' नाम से सीरीज बनाई।
जॉन की जिंदगी की सबसे अजीब बात ये है कि उसके लिए जेल और फाइव स्टार होटल, दोनों एक जैसे ही थे। पुलिस को उसने बताया कि जेल उसका ‘होम स्टे’ है और लग्जरी होटल उसकी ‘टूरिस्ट डेस्टिनेशन’। खाने के मामले में भी उसकी पसंद साफ थी, या तो पांच सितारा होटल का खाना चाहिए वरना जेल की रोटी भी चलेगी, बीच का कुछ नहीं।
पुलिस के मुताबिक जॉन की ये पूरी कहानी 1990 के दशक की शुरुआत में उसकी मंगेतर की मौत के बाद शुरू हुई। उस सदमे के बाद उसने शादी का इरादा छोड़ दिया और धोखाधड़ी की दुनिया में उतर गया। पहली गिरफ्तारी 1996 में हुई, जब उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल भेजा गया। इसके बाद से अब तक जांच एजेंसियों का कहना है कि जॉन करीब 15 साल जेल में बिता चुका है, लेकिन हर बार बाहर निकलते ही वो फिर उसी पुराने खेल में लौट आया।
फिलहाल जॉन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। लेकिन सवाल यही उठता है कि तीन दशक से ज्यादा वक्त तक, 10 राज्यों में, 300 होटलों को चूना लगाने वाला शख्स आखिर इतने लंबे समय तक पकड़ में क्यों नहीं आया। होटल इंडस्ट्री में पहचान जांचने का जो प्रोसेस होता है, उसके बाद हर जगह ऐसी चूकी कैसे होती रही, ये सवाल अब पुलिस जांच में भी उठ रहा है।