
BJP Alliance Preparing New Bills in Parliament : देश ही नहीं, संसद में भी भाजपा पहले से बहुत अधिक मजबूत हो गई है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि प्रांतीय या क्षेत्रीय दलों में बगावत या उनके टूटने से संसद में भाजपा के लिए आसानी हो गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक तिहाई बहुमत के करीब पहुंच रही एनडीए सरकार 17 जुलाई को 130वां संवैधानिक संशोधन विधेयक भी पेश कर सकती है, जिसमें गंभीर अपराधों के लिए 30 दिनों तक गिरफ्तारी या हिरासत में रहने के बाद मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है। इसके अलावा आगामी मानसून सत्र में परिसीमन संबंधी संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित कराने और महिला आरक्षण कानून को लागू करने का एक और प्रयास कर सकती है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हाल ही में हुई बगावत से सत्ताधारी भाजपा गठबंधन के पक्ष में पलड़ा झुक गया है और बहुमत मिलने की संभावना नजर आ रही है, लेकिन अभी भी उसके लिए बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) में हाल ही में हुए विभाजन से सत्ताधारी एनडीए के पक्ष में माहौल बन गया है। क्यों कि जून में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और शिवसेना (यूबीटी) के विभाजन के साथ ही, इन विपक्षी दलों के बिखरने की गति और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के लिए अलग हुए गुटों के समर्थन से संकेत मिलता है कि सत्तारूढ़ दल संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने और संविधान में संशोधन करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था।
भारतीय जनता पार्टी के पास अभी लोकसभा में 240 चुने हुए सांसद हैं। अंदरूनी बदलावों के बाद भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास निचले सदन में 318 सीटों का बहुमत है, जो सामान्य कानून पास करने के लिए काफी है। गौरतलब है कि हाल ही में बागी तृणमूल कांग्रेस सांसदों का एक गुट अलग होकर एनडीए में शामिल हो गया, जिससे लोकसभा में आधिकारिक टीएमसी के पास 8 सांसद रह गए। शिवसेना (यूबीटी) में टूट से महाराष्ट्र में राजनीतिक बदलाव आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 एनडीए के साथ जुड़ गए।
बहरहाल, संसद में विशेष बहुमत के नजरिये से देखें तो एनडीए के पास आसान साधारण बहुमत है , जिसके लिए 543 में से 272 सीटों की जरूरत होती है, लेकिन बड़े संवैधानिक संशोधनों को पास करने के लिए मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। भाजपा गठबंधन ने दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के मकसद से अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं।