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अपने बड़े नेताओं के क्षेत्र में हार रही बीजेपी, नागपुर से पटना और वाराणसी तक लगे झटके; जानें क्या है संदेश

NDA MLC Election Results: चार राज्यों की 28 एमएलसी सीटों पर हुए चुनाव में NDA ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन वाराणसी, नागपुर और पटना जैसे बीजेपी के मजबूत गढ़ों में मिली हार ने पार्टी की रणनीति और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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Updated: 29 Oct 2026, 12:23 PM IST
NDA MLC Election Results
बीजेपी के बड़े नेताओं के क्षेत्र में पार्टी को मिल रही हार (Photo-IANS)

BJP MLC Election Results: देश के चार राज्यों की 28 एमएलसी सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को 16 सीटों पर जीत मिली है। भले ही एमएलसी चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया हो, लेकिन कई ऐसी सीटों पर हार मिली है। जिन पर पार्टी के बड़े नेता प्रतिनिधित्व करते है। इसमें वाराणसी, पटना और नागपुर है। दरअसल, वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी सांसद है, जबकि पटना के बांकीपुर से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन आते है। तो वहीं नागपुर में आरएसएस का प्रभाव है। 

बता दें कि इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन की सीट बांकीपुर खाली हुई थी। इस सीट पर हुए उपचुनाव में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज की थी। 

बांकीपुर उपचुनाव से लेकर एमएलसी चुनाव में बीजेपी के बड़े नेताओं के क्षेत्र में मिली हार के बाद अब सवाल है कि क्या ये अलग-अलग चुनावों के नतीजे महज स्थानीय समीकरणों का परिणाम हैं या फिर बीजेपी के परंपरागत राजनीतिक आधार में बदलाव के संकेत दे रहे हैं? 

वाराणसी: प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में बीजेपी की हार का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से सांसद है। यहां की शिक्षक एमएलसी सीट पर समाजवादी पार्टी की जीत ने बीजेपी को एक बड़ा झटका दिया है। दरअसल, यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होने है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले एमएलसी चुनाव को सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा सकता है। 

वाराणसी का राजनीतिक महत्व सिर्फ इसलिए नहीं है कि यहां से प्रधानमंत्री मोदी सांसद हैं। यह पूर्वांचल की राजनीति का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

दरअसल, वाराणसी डिवीजन के ग्रेजुएट और टीचर्स MLC चुनाव क्षेत्र में आठ जिले आते हैं। इनमें बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र शामिल हैं। इन आठ जिलों में कुल 47 विधानसभा सीटें हैं।

विधानसभा चुनाव 2022  में इन 47 विधानसभा सीटों में से NDA ने 28 सीटों पर जीत हासिल की थी। इनमें BJP ने 22, अपना दल (एस) ने तीन और निषाद पार्टी ने तीन सीटें जीती थीं।

वहीं, समाजवादी पार्टी को 14 सीटें मिली थीं। उस समय सपा के साथ गठबंधन में रही ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने चार सीटें जीती थीं। एक सीट BSP के खाते में गई थी। हालांकि, अब ओम प्रकाश राजभर की पार्टी NDA में शामिल हो चुकी है और राजभर यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

खास बात यह है कि BJP सरकार में भी इन आठ जिलों को काफी अहमियत मिली है। इन जिलों से नौ राज्य कैबिनेट मंत्री आते हैं।

वाराणसी शिक्षक एमएलसी सीट पर मिली हार बीजेपी के लिए झटका माना जा रहा है। क्योंकि इस हार ने बीजेपी के सामने स्थानीय मतदाता समूहों में अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती को फिर सामने ला दिया है।

नागपुर: RSS के मुख्यालय वाले शहर में बीजेपी को झटका क्यों अहम है?

महाराष्ट्र के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में अपने गढ़ में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के प्रत्याशी अभिजीत वंजारी को जीत मिली है। 

बता दें कि नागपुर को आरएसएस और बीजेपी का अभेद्य किला माना जाता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है।

ऐसे में नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था। MLC चुनाव में मिला हार के बाद पार्टी के स्थानीय संगठन की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। 

पटना: पांच बार के एमएलसी नवल किशोर यादव की हार के क्या मायने हैं?

बिहार की राजनीति में पटना को बीजेपी का मजबूत क्षेत्रों में माना जाता है। पटना साहिब से पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद सांसद है। वहीं बांकीपुर भी इसी लोकसभा क्षेत्र की विधानसभा सीट है। यह सीट भी बीजेपी का गढ़ मानी जाती थी। लेकिन नितिन नवीन के छोड़ने के बाद हुए उपचुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। 

वहीं अब पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के वरिष्ठ नेता नवल किशोर यादव को हार का सामना करना पड़ा है। इस हार के साथ ही राजनीतिक हलकों में नई चर्चा भी छिड़ गई है। 

आरजेडी के उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार ने नवल किशोर यादव को 1,057 मतों से हराया। बता दें कि यह बीजेपी प्रत्याशी की हार नहीं है। इस परिणाम ने उस सीट पर बीजेपी के लंबे राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती दी है। जहां पार्टी के उम्मीदवार को लगातार सफलता मिलती रही थी।

ऐसा ही बाकीपुर विधानसभा सीट पर भी हुआ था। दरअसल, नितिन नवीन यहां से लगातार विधायक चुने जा रहे थे। लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और राज्य सभा जाने के बाद नितिन नवीन को यह सीट छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद हुए उपचुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। इस सीट पर पार्टी को मिली हार ने बिहार में उसके स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

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29 Oct 2026, 12:23 PM IST
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