कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यूनियन बजट 2026-27 को नीति और समाधान विहीन बताया। उन्होंने किसानों, सामाजिक वर्गों और राज्यों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर सवाल उठाए।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर दिया है। बजट सामने आने के बाद से ही इसे लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। विपक्षी नेता ने इसे एकतरफा और आम जनता की अपेक्षाओं से विपरीत बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। इसी कड़ी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का बजट पर बयान सामने आया है। खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए यह दावा किया है कि मोदी सरकार के पास विचारों और दूरदृष्टि की कमी हो गई है।
खरगे ने एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, देश इस समय आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा है, लेकिन बजट में इन समस्याओं का कोई ठोस समाधान नजर नहीं आता। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार के पास न तो नीति दृष्टि बची है और न ही राजनीतिक इच्छाशक्ति, और यह बजट उसी खालीपन को उजागर करता है। खरगे ने कहा कि मोदी सरकार अब विचारों से खाली हो चुकी है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि मिशन मोड अब चैलेंज रूट बन गया है और रिफॉर्म एक्सप्रेस शायद ही किसी रिफॉर्म जंक्शन पर रुकती है।
खरगे के अनुसार बजट 2026 में न कोई ठोस नीति दिखाई देती है और न ही ऐसे नारे जो नीति के अभाव को ढक सकें। कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे सरकार की विफलता का प्रतीक बताते हुए कहा कि देश को दिशा देने वाला विजन पूरी तरह गायब है। खरगे ने आगे कहा कि देश के किसान अब भी किसी सार्थक वेलफेयर सपोर्ट या इनकम सिक्योरिटी प्लान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में असमानता ब्रिटिश राज के स्तर से भी आगे निकल चुकी है, लेकिन बजट में इसका जिक्र तक नहीं है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए किसी विशेष समर्थन की घोषणा नहीं की गई। खरगे के अनुसार यह बजट सामाजिक न्याय की भावना को पूरी तरह नजरअंदाज करता है।
खरगे ने वित्त आयोग की सिफारिशों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे राज्यों को कोई खास राहत मिलती नहीं दिख रही, जबकि वे गंभीर वित्तीय दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि फेडरलिज्म इस बजट में भी हताहत हुआ है। दूसरी ओर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में वित्त वर्ष 2027 के लिए कैपेक्स लक्ष्य 12.2 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की, जो मौजूदा वर्ष के 11.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की बात भी कही गई, लेकिन कांग्रेस इसे अपर्याप्त मानती है।