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कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: वोटिंग के दिन बाइक चलाने पर रोक नहीं लगा सकता चुनाव आयोग

Calcutta High Court Bike Ban Order: कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव के दौरान बाइक चलाने पर पूरी तरह रोक लगाने के चुनाव आयोग के फैसले को गलत ठहराया है। जानिए क्या है नया नियम और किन पाबंदियों में किया गया बदलाव।

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Apr 24, 2026
Calcutta High Court West Bengal Election Bike Riding (AI Image)

Calcutta High Court West Bengal Election Bike Riding: पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले बाइक चलाने पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर बड़ा फैसला आया है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि चुनाव आयोग कानून-व्यवस्था के नाम पर मोटरसाइकिल चलाने पर पूरी तरह रोक नहीं लगा सकता है। अदालत ने माना कि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव जरूरी हैं, लेकिन इसके नाम पर आम लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही पर संपूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है।

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क्या है पूरा मामला?

चुनाव से पहले भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें मतदान से दो दिन पहले और मतदान के दिन रात 6 बजे से सुबह 6 बजे तक मोटरसाइकिल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी। केवल मेडिकल इमरजेंसी या जरूरी पारिवारिक कारणों में ही छूट दी गई थी।

इस आदेश को अधिवक्ता ऋतांकर दास ने चुनौती दी थी। उनका कहना था कि इस तरह की पाबंदी आम लोगों खासकर पेशेवरों की आवाजाही और कामकाज को प्रभावित करती है और यह उनके मौलिक अधिकारों पर असर डालती है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस कृष्णा राव की पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए व्यापक अधिकार जरूर हैं, लेकिन ये अधिकार कानून के दायरे में रहकर ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

अदालत ने टिप्पणी की कि सिर्फ 'फ्री और फेयर इलेक्शन' के नाम पर मोटरसाइकिल चलाने पर पूरी तरह रोक लगाना समझ से परे है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा संपूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है और इसे हटाया जाना चाहिए।

किन पाबंदियों को बरकरार रखा गया?

हालांकि कोर्ट ने पूरी तरह से सभी प्रतिबंध नहीं हटाए। कुछ नियमों को संशोधन के साथ बरकरार रखा गया है। चुनाव से दो दिन पहले से बाइक रैलियों पर रोक जारी रहेगी, ताकि किसी भी तरह की हिंसा या तनाव को रोका जा सके। मतदान से 12 घंटे पहले बाइक पर दो लोगों के साथ बैठने पर रोक रहेगी, लेकिन मेडिकल इमरजेंसी या जरूरी कामों में छूट दी गई है।

मतदान के दिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक परिवार के साथ बाइक पर बैठकर वोट डालने या जरूरी कामों के लिए जाने की अनुमति दी गई है।

किसे मिली छूट?

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कुछ जरूरी सेवाओं को इस पाबंदी से बाहर रखा जाएगा। ओला, उबर, जोमैटो, स्विगी जैसी सेवाओं से जुड़े लोग, ऑफिस जाने वाले कर्मचारी और अन्य जरूरी सेवाओं में लगे लोग पहचान पत्र के साथ बाइक का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि जरूरी सेवाएं बाधित न हों।

कोर्ट ने क्यों हटाई पूरी पाबंदी?

अदालत ने कहा कि राज्य में पहले से ही पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात हैं जो चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त हैं। इसके अलावा वाहनों की जांच की भी व्यवस्था है।

ऐसे में सभी लोगों पर एक साथ प्रतिबंध लगाना जरूरी नहीं है। कोर्ट के मुताबिक, इस तरह का संपूर्ण प्रतिबंध कानून में कहीं भी स्पष्ट रूप से प्रावधानित नहीं है।

चुनाव आयोग के अधिकार और सीमाएं

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव कराने का अधिकार है, लेकिन उसे मौजूदा कानूनों और नियमों का पालन करना होगा। इस फैसले से यह संदेश भी गया है कि प्रशासनिक फैसले लेते समय आम नागरिकों की सुविधाओं और अधिकारों का भी ध्यान रखना जरूरी है।

क्या असर पड़ेगा इस फैसले का?

इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल में मतदान के दौरान आम लोगों के लिए आवाजाही आसान होगी। लोग अपने रोजमर्रा के काम के साथ-साथ वोट देने के लिए भी आसानी से आ-जा सकेंगे। साथ ही, यह फैसला भविष्य में भी एक मिसाल बन सकता है जहां चुनाव के नाम पर लगाए जाने वाले अत्यधिक प्रतिबंधों की समीक्षा की जाएगी।

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