CBSE Result Controversy: सीबीएसई 12वीं रिजल्ट में अब सप्लीमेंट्री कॉपियां गायब होने के दावे सामने आने लगे हैं। छात्रों ने ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम में गड़बड़ी, ब्लर स्कैन कॉपियों और पूरक पुस्तिकाओं की जांच नहीं होने के आरोप लगाए हैं। मामले की तकनीकी जांच में IIT मद्रास की टीम भी जुट गई है, जबकि साइबर अटैक एंगल की भी पड़ताल की जा रही है।
CBSE 12th Result: सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पहले मुख्य परीक्षा की कॉपियां बदलने और ऑनस्क्रीन मूल्यांकन में गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे, अब सप्लीमेंट्री (पूरक) कॉपियों के गायब होने के मामले भी सामने आने लगे हैं। इससे हजारों छात्रों के रिजल्ट और भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने दावा किया है कि उनकी सप्लीमेंट्री कॉपियां मूल्यांकन के दौरान शामिल ही नहीं की गईं। कुछ छात्रों का कहना है कि स्कैन कॉपी में सप्लीमेंट्री पेज दिखाई ही नहीं दे रहे, जबकि उन्होंने कई सवालों के जवाब पूरक पुस्तिका में लिखे थे। ऐसे में उन्हें उन उत्तरों के अंक नहीं मिल पाए।
दिल्ली के छात्र हर्ष चौरसिया ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि उनकी फिजिक्स की सप्लीमेंट्री कॉपी गायब है। हर्ष के मुताबिक उन्हें फिजिक्स में 73 अंक मिले, जबकि उनका दावा है कि उनके कम से कम 85 से ज्यादा अंक आने चाहिए थे।
जानकारों और शिक्षकों का मानना है कि इन गड़बड़ियों की बड़ी वजह ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OMS) को जल्दबाजी में लागू करना हो सकता है।
सीबीएसई ने दिसंबर 2025 में डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू करने का फैसला लिया था। इसके लिए लगभग दो महीने की ट्रेनिंग के बाद ही सिस्टम को लागू कर दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े बदलाव के लिए कम से कम छह से सात महीने की तैयारी जरूरी थी।
फिजिक्स के एक वरिष्ठ शिक्षक ने पहले ही ऑनस्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि स्क्रीन पर दिखाई देने वाली कॉपियां काफी धुंधली थीं, जिससे छात्रों के बनाए डायग्राम और उनकी लेबलिंग साफ नजर नहीं आ रही थी। इससे स्टेप मार्किंग करना मुश्किल हो गया।
मामले के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कम नंबरों से फेल हुए छात्रों का भविष्य क्या होगा? जिन छात्रों का प्रतिशत खराब हुआ, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या सिर्फ सामने आए मामलों तक ही गड़बड़ी सीमित है या और भी कॉपियां प्रभावित हुई हैं?
इस बीच IIT मद्रास की टीम ने मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। टीम यह भी जांच करेगी कि कहीं सिस्टम में साइबर हैकिंग या तकनीकी छेड़छाड़ तो नहीं हुई।
सूत्रों के अनुसार IIT मद्रास ने एक फैकल्टी सदस्य और एक प्रोजेक्ट स्टाफ को दिल्ली स्थित सीबीएसई मुख्यालय भेजा है, जो तकनीकी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।