
Supreme Court and Delhi High Court on CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) सोमवार को सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में दो अलग-अलग मामलों में घिर गया। दोनों ही मामलों में कक्षा 12वीं की परीक्षाओं और परिणामों से जुड़ी गंभीर चिंताएं उठाई गईं। सुप्रीम कोर्ट ने सऊदी अरब के एक छात्र की याचिका पर सीबीएसई से जवाब मांगा है। छात्र का कक्षा 12वीं का सुधार परीक्षा परिणाम रोका हुआ है। पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय तनाव के कारण कई सीबीएसई परीक्षा केंद्रों पर परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं। जस्टिस मनमोहन और विजय बिश्नोई की अवकाशकालीन खंडपीठ ने मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। जस्टिस मनमोहन ने छात्र के भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि यह एक बच्चे का करियर है… वह सारी एडमिशन मिस कर देगा।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद झाखड़ की ओर से दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और सीबीएसई को नोटिस जारी किया। याचिका में बोर्ड द्वारा हाल ही में शुरू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि रिजल्ट घोषित होने के बाद छात्रों को ब्लर्ड स्कैन, मिसिंग पेज, अधूरी अपलोड, उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ी और अप्रत्याशित कम अंक मिलने की शिकायतें आईं।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में लगातार सामने आ रही खामियां विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल असर डाल रही हैं। अभिभावकों और छात्रों की ओर से अंक दर्ज करने में गड़बड़ी, उत्तर पुस्तिकाओं के रिकॉर्ड का अभाव और मूल्यांकन में त्रुटियों जैसी शिकायतें बार-बार सामने आ रही हैं। एनएसयूआई का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर कई बार ध्यान दिलाने के बावजूद सीबीएसई पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
एनएसयूआई का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल तकनीकों का विस्तार स्वागतयोग्य है, लेकिन इसके साथ प्रभावी सुरक्षा उपायों और वैकल्पिक बैकअप व्यवस्था का होना भी उतना ही आवश्यक है। याचिका में बोर्ड से छात्रों की शिकायतों के निपटारे के लिए एक पारदर्शी और सशक्त शिकायत निवारण प्रणाली जल्द स्थापित करने की मांग की गई है, ताकि मूल्यांकन संबंधी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
याचिका में ओएसएम प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच, वेरिफिकेशन पोर्टल को एक महीने के लिए फिर खोलने और विवादित मामलों में मैनुअल रीचेकिंग की मांग की गई है। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और मधु जैन की खंडपीठ ने 12 जून को मामले की सुनवाई तय की है।