विदेश मंत्रालय (MEA) ने घोषणा की कि वर्तमान में ब्रिटेन में भारत के हाई कमिश्नर विक्रम के. दोरैस्वामी (1992 बैच IFS) को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है।
ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध के बीच भारत ने चीन के साथ राजनयिक स्तर पर बड़ा कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने 19 मार्च को घोषणा की कि वर्तमान में ब्रिटेन में भारत के हाई कमिश्नर विक्रम के. दोरैस्वामी (1992 बैच IFS) को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। वह जल्द ही बीजिंग पहुंचेंगे और वर्तमान राजदूत प्रदीप कुमार रावत की जगह लेंगे।
यह नियुक्ति इसलिए चर्चा में है क्योंकि दोरैस्वामी ने MEA में अमेरिका डिवीजन (Americas Division) में जॉइंट सेक्रेटरी के रूप में 2012-2014 तक काम किया था। अमेरिका से निकट संबंध रखने वाले इस अनुभवी अधिकारी को अचानक चीन भेजना कई विशेषज्ञों को रणनीतिक लग रहा है। ईरान युद्ध से वैश्विक तेल बाजार अस्थिर है, क्रूड कीमतें बढ़ रही हैं और अमेरिका-चीन तनाव भी जारी है। ऐसे में भारत, जो QUAD और अमेरिका के साथ मजबूत गठबंधन रखता है, लेकिन चीन के साथ सीमा पर LAC तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है, इस नियुक्ति से दोहरी रणनीति अपनाता दिख रहा है।
दोरैस्वामी 'चाइना हैंड' माने जाते हैं। उन्होंने 1996-2000 तक बीजिंग में भारतीय दूतावास में काम किया, चीनी भाषा में डिप्लोमा लिया है और हांगकांग में भी पोस्टिंग रही है। वे चीनी, फ्रेंच और कोरियाई भाषाओं के जानकार हैं। पहले वे उज्बेकिस्तान, दक्षिण कोरिया में राजदूत और बांग्लादेश में हाई कमिश्नर रह चुके हैं। प्राइवेट सेक्रेटरी टू पीएम और SAARC डिवीजन हेड जैसे पद भी संभाले हैं।
चीन ने इस नियुक्ति का स्वागत किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि राजदूत दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग का महत्वपूर्ण पुल होते हैं। चीन ने दोरैस्वामी के चीनी नाम 'वेई जियामेंग' चुनने की सराहना की और उनकी पोस्टिंग में हर सुविधा देने का वादा किया। चीन उम्मीद करता है कि वे दोनों देशों के संबंधों में सतत सुधार और विकास में योगदान देंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि 2020 गलवान संघर्ष के बाद से भारत-चीन संबंधों में सुधार की कोशिशें तेज हुई हैं। डिसइंगेजमेंट, ट्रेड बढ़ाना और बॉर्डर मैनेजमेंट पर बातचीत चल रही है। ग्लोबल अनिश्चितताओं—ईरान युद्ध, अमेरिका-चीन राइवलरी—के बीच भारत बीजिंग के साथ उच्च स्तर की संवाद बनाए रखना चाहता है। दोरैस्वामी की नियुक्ति से भारत संकेत दे रहा है कि वह चीन के साथ प्रोफेशनल और व्यावहारिक तरीके से रिश्ते संभालना चाहता है, बिना अमेरिका गठबंधन से समझौता किए।