
Chirag Paswan Statement: INDIA गठबंधन के नेताओं को मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत से मुलाकात का समय नहीं मिलने पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी संविधान की किताब हाथ में लेकर घूमते रहे, लेकिन संविधान का पाठ उन्हें देश के मुख्य न्यायाधीश ने पढ़ाया है। चिराग ने विपक्ष के ज्ञापन सौंपने की कोशिश पर भी सवाल उठाए है।चिराग पासवान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि आदरणीय राहुल गांधी जी, संविधान की किताब हाथ में लेकर घूमते रहे, पर संविधान का पाठ आखिरकार आज देश के मुख्य न्यायाधीश ने आपको पढ़ाया। निकले थे ज्ञापन लेकर, लौटे CJI से सबक लेकर। उन्होंने आगे कहा कि न्याय याचिका से मांगा जाता है, ज्ञापन से नहीं। SIR पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना चुका है। अदालत में दलीलें नहीं चलीं, तो अब सड़क से अदालत पर दबाव?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CJI जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर 12 अक्टूबर 2026 को शाम 4 से 5 बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। विपक्षी नेता मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपना चाहते थे। उनकी मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक और कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे शामिल थे। विपक्ष चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी उठाता रहा है। हालांकि, CJI सूर्यकांत ने ईमेल के जरिए मुलाकात का अनुरोध कल ही ठुकरा दिया था। दिए गए डिटेल के मुताबिक, उन्होंने बताया कि संबंधित मामले पहले से ही न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।
INDIA गठबंधन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। विपक्ष की मांग है कि मतदाता सूची में किए जाने वाले बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए और वैध मतदाताओं के नाम हटाने से पहले उचित नोटिस तथा कारण बताए जाएं। विपक्ष इसे मतदाताओं के अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा मुद्दा बता रहा है।
चिराग पासवान ने अपने बयान में राहुल गांधी के संविधान संबंधी संदेश और विपक्ष की ओर से CJI को ज्ञापन सौंपने की कोशिश को निशाने पर लिया। उन्होंने सवाल किया कि जब संबंधित मुद्दों पर अदालत में सुनवाई हो सकती है, तो सड़क पर प्रदर्शन के जरिए अदालत पर दबाव बनाने की कोशिश क्यों की जा रही है।