
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों को लेकर राजनीतिक नेताओं और अदालत के बीच बातचीत का रास्ता अब कानूनी प्रक्रिया की ओर मुड़ता दिखाई दे रहा है।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर साफ किया है कि लंबित मामलों पर चर्चा के लिए प्रशासनिक स्तर पर बैठक बुलाना संविधान में तय शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ होगा।
उन्होंने दोनों नेताओं को सलाह दी कि अगर वे इन मुद्दों पर अदालत का ध्यान खींचना चाहते हैं, तो उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करनी चाहिए।
सीजेआई ने यह पत्र 11 अक्टूबर को लिखा था। इसमें उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संविधान के मौलिक अधिकारों और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी। साथ ही उन्होंने भरोसा दिया कि कानून के मुताबिक दाखिल की गई याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने पत्र में कहा कि लंबित मामलों पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ होगा। यह सिद्धांत भारतीय संविधान की मूल संरचना का अहम हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की बैठक स्थापित न्यायिक परंपराओं और उचित प्रक्रिया के भी अनुकूल नहीं होगी। CJI के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के पास प्रशासनिक स्तर पर उन मुद्दों को निपटाने का अधिकार नहीं है, जिनका जिक्र नेताओं ने अपने पत्र में किया है।
सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकती, इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत उससे जुड़े सवालों पर विचार नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 और न्यायिक समीक्षा सहित सुप्रीम कोर्ट को मिली अन्य शक्तियों के तहत अदालत नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करने के लिए बाध्य है।
अनुच्छेद 32 नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है। CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। नागरिक कानून में तय प्रक्रिया के अनुसार किसी भी समय अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को सलाह दी कि वे प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन देने के बजाय सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक शक्तियों का इस्तेमाल करें। इसके लिए वे उचित याचिका दाखिल कर सकते हैं।
CJI ने अपने पत्र में बताया कि इसी तरह के मुद्दों से जुड़े कुछ मामले मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि यदि दोनों नेता उचित समझें, तो सोमवार को याचिका दाखिल कर सकते हैं।
याचिका सुप्रीम कोर्ट में सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच व्यक्तिगत रूप से जमा की जा सकती है। इसके अलावा ई-फाइलिंग की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसके जरिए किसी भी दिन और किसी भी समय याचिका दाखिल की जा सकती है।
CJI सूर्यकांत ने अपने पत्र में भरोसा दिलाया कि कानून के मुताबिक दाखिल की गई ऐसी किसी भी याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी।