
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के बाद देश के प्रमुख राजनीतिक दलों और नेताओं ने युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया रणनीति में बदलाव किया है। इसका सबसे ज्यादा असर इंस्टाग्राम पर नजर आया है। डेटा बीइंग्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जुलाई के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंस्टाग्राम पोस्ट पर औसत एंगेजमेंट में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का औसत इंस्टाग्राम एंगेजमेंट 1.19 मिलियन से बढ़कर 4.63 मिलियन प्रति पोस्ट हो गया। यानी इसमें 289.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, राहुल गांधी का औसत एंगेजमेंट 1.52 लाख से बढ़कर 4.26 लाख प्रति पोस्ट हो गया, जो 180.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
डेटा बीइंग्स के अनुसार, 20 जुलाई को नई दिल्ली में CJP की ओर से संसद तक निकाले गए ‘संसद चलो’ मार्च और उसके बाद पुलिस के साथ हुए टकराव के बाद राजनीतिक इंस्टाग्राम अकाउंट्स की गतिविधियों में बदलाव दिखाई दिया। आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई के बाद नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, कांग्रेस और भाजपा चारों के इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर प्रति पोस्ट औसत एंगेजमेंट बढ़ा। प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से सीधे जुड़ने के लिए इंस्टाग्राम पर लगातार रील्स पोस्ट कीं। इनमें कुछ पोस्ट देर रात तक भी किए गए। वहीं राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम पर आस्क मी एनीथिंग (AMA) सेशन में हिस्सा लिया और छात्रों के साथ बातचीत के रील्स भी साझा किए।
20 जुलाई से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पोस्ट पर औसतन करीब 11.9 लाख एंगेजमेंट मिल रहे थे। प्रदर्शन के बाद यह आंकड़ा बढ़कर करीब 46.3 लाख हो गया। यानी औसत एंगेजमेंट में करीब 3.9 गुना वृद्धि हुई। राहुल गांधी के मामले में भी बड़ा उछाल देखने को मिला। उनका औसत एंगेजमेंट 1.52 लाख से बढ़कर 4.26 लाख हो गया। यानी इसमें करीब 2.8 गुना वृद्धि दर्ज की गई।
आंकड़ों के मुताबिक, कांग्रेस के इंस्टाग्राम अकाउंट का औसत एंगेजमेंट 20 जुलाई से पहले करीब 50 हजार प्रति पोस्ट था, जो बाद में बढ़कर 72 हजार हो गया। इसमें 43.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी तरह भाजपा का औसत एंगेजमेंट 25 हजार से बढ़कर 34 हजार हो गया। पार्टी के एंगेजमेंट में 37.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि इंस्टाग्राम राजनीतिक संवाद और युवाओं तक पहुंच बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है। हालांकि, सिर्फ सोशल मीडिया एंगेजमेंट के आधार पर चुनावी प्रभाव या राजनीतिक सफलता का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। आंकड़े इंस्टाग्राम पर लोगों की प्रतिक्रिया और सक्रियता को दर्शाते हैं, लेकिन इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि इसका असर मतदाताओं के व्यवहार या चुनावी नतीजों पर भी पड़ेगा। यह देखना बाकी है कि सोशल मीडिया पर बढ़ी यह सक्रियता जमीन पर राजनीतिक समर्थन और चुनावी परिणामों में कितना बदलाव ला पाती है।