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रात की गर्मी से उड़ रही नींद, दिन की लू से सेहत पर संकट; भारत के लिए लैंसेट की चेतावनी

Lancet Report: लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जलवायु परिवर्तन से लू, गर्मी के तनाव, डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ रहा है। जानिए नवजातों, बुजुर्गों और अर्थव्यवस्था पर इसका कितना असर पड़ रहा है।
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Updated: 29 Oct 2026, 2:00 AM IST
Economic Loss Due to Climate
भारत में जलवायु परिवर्तन का सेहत पर वार, Photo Source@ChatGpt

Global Health Emergency: मेडिकल जर्नल लैंसेट की ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में गर्मी का तनाव और जानलेवा बीमारियों का खतरा खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। धरती का बढ़ता तापमान अब सीधे तौर पर भारतीयों की सेहत और जेब पर भारी पड़ रहा है। भारत दुनिया के उन शीर्ष देशों में शामिल है, जहां नवजात शिशुओं और 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को सबसे ज्यादा जानलेवा लू का सामना करना पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह एक 'ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी' बन चुका है।

सालाना 2600 घंटे गर्मी का तनाव

भारत में लोग हर साल औसतन 2,600 से अधिक घंटे ऐसे माहौल में बिता रहे हैं, जहां सामान्य काम करने पर भी शरीर पर अत्यधिक 'हीट स्ट्रेस' (गर्मी का दबाव) पड़ता है। यह 1990 के दशक की तुलना में 200 घंटे ज्यादा है। वहीं, रात का तापमान बढ़ने की वजह से भारतीयों की नींद खराब हो रही है।  मौसम के असामान्य बर्ताव के कारण बीमारियां फैलने का खतरा भी लगातार मंडराने लगा है। ऐस में अब जलवायु परिवर्तन ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी बन गया है।

193 अरब संभावित कार्य घंटों का नुकसान 

अत्यधिक गर्मी के कारण भारत में साल 2016 से 2025 के बीच हर साल औसतन 193 अरब संभावित कार्य घंटे का नुकसान हुआ है। यह 1990 के दशक के मुकाबले 75% अधिक है। इसका सीधा असर खेती-किसानी और मजदूरी करने वालों पर पड़ा है। सिर्फ 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों की वजह से सालाना 3.21 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान आंका गया है।

डेंगू-मलेरिया ने तेजी से पसारे अपने पैर

मौसम में आ रहे बदलावों (बढ़ती गर्मी और बेमौसम बारिश) के कारण भारत में डेंगू, मलेरिया और पानी से फैलने वाले इन्फेक्शन का खतरा बहुत तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि अब इन मच्छरों और बैक्टीरिया को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिल रहा है। वहीं, भारत में हवा के प्रदूषण के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान का मूल्य 43.5 लाख करोड़ रुपए (जीडीपी का 13.5%) तक पहुंच गया है।

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