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IDBI बैंक को लेकर राहुल गांधी-निर्मला सीतारमण आमने-सामने, वित्त मंत्री ने गिनाए कांग्रेस राज के पुराने घोटाले

आईडीबीआई बैंक के निजीकरण और हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी ने जहां केंद्र सरकार पर देश के बैंक बेचने का आरोप लगाया, वहीं वित्त मंत्री सीतारमण ने पलटवार करते हुए कांग्रेस शासनकाल में बैंकों के दुरुपयोग और वित्तीय घोटालों की पूरी सूची गिना दी।
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भारत

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kamlesh sharma

•

Updated: 30 Oct 2026, 12:21 PM IST

Nirmala Sitharaman-Rahul Gandhi

Nirmala Sitharaman-Rahul Gandhi (Photo-IANS)

नई दिल्ली। आईडीबीआई बैंक के निजीकरण और हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में आईडीबीआई बैंक की स्थापना देश में उद्योगों को खड़ा करने के लिए की गई थी, जबकि मोदी सरकार के समय पहले बैंक की बोली लगाई गई और फिर उसकी कीमत तय हुई। इस पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर बैंकिंग व्यवस्था का राजनीतिक इस्तेमाल करने और प्रभावशाली लोगों को नियमों को दरकिनार कर कर्ज दिलाने के आरोप लगाए।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'कांग्रेस के समय में IDBI बना- देश का उद्योग खड़ा करने के लिए। मोदी के समय में पहले बोली देखी गई, फिर दाम तय हुआ। कांग्रेस के टाइम पे बैंक बनते थे। मोदी के टाइम में बिकते हैं।'

निर्मला सीतारमण का किया पलटवार

राहुल गांधी के आरोपों के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया एक्स पर लंबी पोस्ट लिखकर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निजी संस्थाओं की तरह इस्तेमाल किया। बैंक कर्मचारियों पर राजनीतिक प्रभावशाली लोगों की पसंद के अनुसार कर्ज देने का दबाव बनाया जाता था और इसके लिए बैंकिंग नियमों को भी दरकिनार किया जाता था।

सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस के दौर में प्रभावशाली लोगों के लिए बैंकिंग व्यवस्था अलग थी, जबकि आम नागरिकों को नियमों के दायरे में रखा जाता था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय बैंकिंग में 'फोनबुक' प्रभावशाली लोगों के लिए और 'रूलबुक' आम नागरिकों के लिए होती थी। अब कनेक्शन और सेटिंग बैंकिंग का युग खत्म हो गया है।

गिनाए कांग्रेस राज के पुराने घोटाले

वित्त मंत्री ने कांग्रेस राज में बैंकिंग व्यवस्था में राजनीतिक हस्तक्षेप के कई उदाहरण भी गिनाए। सीतारमण ने आरोप लगाया कि 1957 में कांग्रेस नेताओं के प्रभाव के कारण हरिदास मुंद्रा को LIC के जरिए पैसा मिला था। 1976 में इंदिरा गांधी सरकार ने SBI के तत्कालीन चेयरमैन आरके तलवार को पद से हटा दिया था। तलवार ने संजय गांधी के करीबी लोगों से जुड़ी कंपनी को कर्ज देने की शर्तों में ढील देने के राजनीतिक दबाव को स्वीकार नहीं किया था। संजय गांधी ने मारुति को लोन देने के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर दबाव बनाया था। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी सरकार में वित्त राज्य मंत्री रहे बी. जनार्दन पुजारी ने 1980 के दशक में बैंक कर्मचारियों पर लोन जारी करने के लिए दबाव बनाया था। UPA सरकार में मंत्री रहे पवन कुमार बंसल ने केनरा बैंक पर दबाव डाला कि वह उनके परिवार से जुड़े व्यवसायों को लोन दे।

एनडीए सरकार ने IDBI बैंक को 25 हजार करोड़ देकर उबारा

सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने IDBI बैंक की हालत बेहद खराब कर दी थी। बैंक को उन बड़े व्यापारिक समूहों (जैसे वीडियोकॉन, विंसम, एबीजी शिपयार्ड और किंगफिशर) को लोन देने पर मजबूर किया गया, जिनके कांग्रेस नेताओं से करीबी संबंध थे। ये लोन बाद में एनपीए (NPA) में बदल गए। वित्त मंत्री ने कहा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने 25,000 करोड़ रुपए से अधिक का पुनर्गठन और पूंजी डालकर IDBI बैंक को फिर से मजबूत बनाया है। बैंक के पुनर्गठन में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया है।

राफेल का जिक्र कर कांग्रेस को दी चेतावनी

वित्त मंत्री ने कहा कि राफेल को लेकर कांग्रेस ने जो आरोप लगाए थे, वे बेनकाब हो गए और पार्टी को माफी मांगनी पड़ी थी। सीतारमण ने कहा कि IDBI बैंक के मामले में भी कांग्रेस के आरोपों का यही हश्र होगा। उन्होंने फरवरी 2024 में जारी भारतीय अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र का हवाला देते हुए कहा कि इसमें कांग्रेस के शासनकाल के कई कथित घोटालों और आर्थिक कुप्रबंधन का उल्लेख है और उसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।