राष्ट्रीय

मुख्यमंत्री विजय ने पलट दिया पूरा गेम! तमिलनाडु में रातों-रात 25 विधायकों ने EPS की पीठ में घोंपा छुरा

CM Vijay masterstroke: तमिलनाडु की राजनीति में रातों-रात बड़ा उलटफेर हुआ है, जहां सीएम विजय के एक मास्टरस्ट्रोक से ईपीएस (EPS) के खेमे में भारी टूट हो गई है। ईपीएस के 25 विधायकों ने अचानक बगावत कर दी है।

4 min read
May 13, 2026
मुख्यमंत्री विजय (X)

CV Shanmugam : फ्लोर टेस्ट में 25 अन्नाद्रमुक विधायकों की ओर से सत्तारूढ़ टीवीके का समर्थन करने के बाद, बुधवार को सीवी शनमुगम ने पार्टी के व्हिप पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने साफ किया कि पार्टी के विधायकों ने एडापड्डी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) को विधायक दल के नेता के रूप में मान्यता देने वाले किसी भी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। विधानसभा में अन्नाद्रमुक के दो गुटों (डीएमके बनाम एडीएमके) के बीच चल रही इस तीखी खींचतान के बावजूद मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके ने 120 विधायकों का समर्थन होने के बावजूद 144 मतों के साथ फ्लोर टेस्ट पास कर लिया।

ये भी पढ़ें

Tamil Nadu Politics: विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे CM विजय, जानें क्या है पूरा गणित

ईपीएस के दावों पर शनमुगम का पलटवार

शनमुगम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि ईपीएस की ओर से विधानसभा नेता, उपनेता और व्हिप के चुनाव के लिए जिस विधायकों की बैठक का दावा किया जा रहा है, वह कभी हुई ही नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सी. विजयभास्कर विधानसभा में अन्नाद्रमुक के व्हिप हैं। शनमुगम का दावा है कि पार्टी महासचिव सीधे तौर पर पार्टी व्हिप की नियुक्ति नहीं कर सकता। जबकि दूसरी ओर ईपीएस ने दावा किया था कि कृष्णमूर्ति पार्टी के व्हिप हैं। ईपीएस की ओर से दिखाए गए पत्र को 'फर्जी' करार देते हुए अन्नाद्रमुक विधायक ने कहा कि फ्लोर टेस्ट में टीवीके का समर्थन न करने को लेकर पार्टी के भीतर कोई प्रस्ताव ही नहीं लाया गया था।

25 विधायकों ने टीवीके नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का समर्थन किया

उन्होंने कहा, 'अन्नाद्रमुक की ओर से 25 विधायकों ने टीवीके नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का समर्थन किया है। टीवीके का समर्थन न करने के प्रस्ताव पर 47 विधायकों के हस्ताक्षर की बात कहकर ईपीएस झूठ बोल रहे हैं। 47 विधायकों ने इस प्रस्ताव पर कब हस्ताक्षर किए? ईपीएस ऐसा दावा कर ही नहीं सकते क्योंकि प्रस्ताव को लेकर ऐसी कोई बैठक हुई ही नहीं। ईपीएस ने स्पीकर को जो पत्र दिया है वह पूरी तरह फर्जी है।' उन्होंने कहा, 'वह यह भी दावा कर रहे हैं कि हमारे विधायकों ने विधानसभा नेता, उपनेता और व्हिप की घोषणा करने के लिए हस्ताक्षर करके अनुमति दी है, लेकिन हमारे विधायकों ने किसी अन्य कारण से हस्ताक्षर किए थे, न कि उस कारण के लिए जिसका दावा एडापड्डी पलानीस्वामी कर रहे हैं।"

शनमुगम ने दी सबूत पेश करने की चुनौती

शनमुगम ने पलानीस्वामी को चुनौती दी कि वे बैठक होने और पार्टी सदस्यों द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने का सबूत पेश करें। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, 'क्या वे इस बात का सुबूत दिखा सकते हैं कि विधायकों की बैठक कब हुई? उन्हें हस्ताक्षर कब मिले? क्या उनमें यह सुबूत दिखाने की हिम्मत है कि प्रस्ताव कब पारित हुआ और विधायकों से हस्ताक्षर कब लिए गए? अब तक अन्नाद्रमुक विधायकों की ऐसी कोई बैठक नहीं हुई है। वे विधायकों की बैठक के नाम पर कोई तस्वीर दिखा सकते हैं, लेकिन वह सिर्फ एक अनौपचारिक मुलाकात थी।'

व्हिप की नियुक्ति और बहुमत पर विवाद

ईपीएस के उस दावे पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि दूसरे गुट के सदस्यों ने महासचिव द्वारा नियुक्त व्हिप के निर्देशों की अवहेलना की है, शनमुगम ने कहा कि पार्टी के विधायकों ने सी. विजयभास्कर को व्हिप चुना था, न कि कृष्णमूर्ति को
चुना था। ईपीएस के विधानसभा नेता चुने जाने की बात को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि महासचिव कथित तौर पर बहुमत का समर्थन न मिलने की हताशा में ऐसा कर रहे हैं।

'मंत्री पद के लालच' में आने के ईपीएस के दावों पर पलटवार

शनमुगम ने साफ किया, "महासचिव विधानसभा व्हिप का चयन नहीं कर सकते; यह काम सभी विधायकों का है कि वे अपना व्हिप चुनें। पार्टी व्हिप सीधे पार्टी महासचिव की ओर से नियुक्त नहीं किया जा सकता। टीवीके का समर्थन करने वाले सदस्यों पर 'मंत्री पद के लालच' में आने के ईपीएस के दावों पर पलटवार करते हुए शनमुगम ने आरोप लगाया कि दरअसल यह ईपीएस ही थे जिन्होंने द्रमुक (DMK) के समर्थन की उम्मीद में विधायकों को लालच दिया था। उन्होंने आरोप लगाया, 'एडापड्डी पलानीस्वामी ने कहा था कि हम अन्नाद्रमुक की सरकार बनाने जा रहे हैं और द्रमुक हमें बाहर से समर्थन देगी। उन्होंने ही विधायकों को मंत्री पद का लालच दिया था।'

ईपीएस का पक्ष: विश्वासघात और अनुशासनहीनता

इससे पहले, अन्नाद्रमुक महासचिव एडापड्डी के. पलानीस्वामी ने कहा था कि विधानसभा के फैसलों में पार्टी का व्हिप सर्वोच्च है और 'कोई भी' महासचिव के खिलाफ नहीं जा सकता। ईपीएस ने कहा था, "हमने कृष्णमूर्ति को पार्टी व्हिप नियुक्त किया था और सभी विधायकों को इसकी जानकारी दे दी गई थी। हालांकि, विधायक चुने गए कुछ पूर्व मंत्रियों ने ऐसे बयान दिए जो पार्टी के साथ विश्वासघात और राजनीतिक अनुशासनहीनता है। अपना रुख स्पष्ट करने के बाद भी उन्होंने सत्तारूढ़ सरकार का समर्थन करने की घोषणा की, जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि जिन विधायकों ने पार्टी को धोखा दिया, वे प्रलोभन के शिकार हुए हैं।

मंत्री बनने की लालसा ने उन्हें नेतृत्व के निर्देशों के खिलाफ जाने मजबूर कर दिया

ईपीएस ने कहा, 'अन्नाद्रमुक के 47 विधायक 'दो पत्ती' चुनाव चिह्न पर जीतकर आए थे। पार्टी के प्रति वफादार रहने के बजाय उन्होंने धोखा दिया। मंत्री बनने की उनकी लालसा ने उन्हें नेतृत्व के निर्देशों के खिलाफ जाने पर मजबूर कर दिया। यह न्याय और नियम दोनों के खिलाफ है। यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले गुट ने तमिलनाडु विधानसभा के फ्लोर टेस्ट में टीवीके सरकार का समर्थन कर दिया, जिससे पार्टी के भीतर की दरार खुलकर सामने आ गई है। ( इनपुट : ANI)

Also Read
View All