Legal Action: सोशल मीडिया पर कॉलेज कपल का कथित निजी वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने सख्त चेतावनी दी है कि इसे देखना या शेयर करना आईटी एक्ट के तहत गंभीर अपराध है। ऐसा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई और जेल भी हो सकती है, इसलिए किसी भी संदिग्ध लिंक को फॉरवर्ड करने से बचें।
Social Media: इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में निजता (Privacy) का उल्लंघन एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। हाल ही में एक कथित '19-मिनट' के वीडियो के चर्चा में (College Viral Video) रहने के बाद, अब एक और नया मामला सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफार्मों पर हड़कंप मचा दिया है। खबरों के मुताबिक, एक 'कॉलेज कपल' का निजी वीडियो (MMS Leak) टेलीग्राम, ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है।
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रिपोर्ट्स के अनुसार, इंटरनेट पर एक वीडियो क्लिप सर्कुलेट हो रही है, जिसे एक कॉलेज के छात्र-छात्रा से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जैसे ही यह वीडियो सामने आया, सोशल मीडिया पर 'लिंक' मांगने और शेयर करने की होड़ मच गई। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि कैसे डिजिटल दुनिया में किसी की निजी जिंदगी को सार्वजनिक तमाशा बना दिया जाता है। इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जहां कपल्स के निजी पलों को बिना उनकी सहमति के रिकॉर्ड कर लीक कर दिया गया।
यह वीडियो विशेष रूप से टेलीग्राम ग्रुप्स और ट्विटर के जरिए फैलाया जा रहा है। अक्सर देखा गया है कि साइबर अपराधी ऐसे वीडियो को 'क्लिकबेट' के रूप में इस्तेमाल करते हैं ताकि यूजर्स को संदिग्ध वेबसाइटों पर ले जाया जा सके। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे वीडियो न केवल पीड़ितों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि इन्हें डाउनलोड करना आपके डिवाइस की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
भारत में किसी की सहमति के बिना उसका निजी या अश्लील वीडियो बनाना और उसे प्रसारित करना एक दंडनीय अपराध है।
IT एक्ट 2000 की धारा 67A: इसके तहत अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित या प्रसारित करने पर 5 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन: किसी की निजता का हनन करना मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। पुलिस ऐसे मामलों में वीडियो शेयर करने वालों (Forwards) को भी आरोपी बना सकती है।
इसलिए, अगर आपके पास ऐसा कोई वीडियो आता है, तो उसे डिलीट कर दें और आगे फॉरवर्ड न करें। उसे रिपोर्ट करना एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।
इस घटना पर इंटरनेट यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक तरफ जहां कुछ लोग असंवेदनशीलता दिखाते हुए वीडियो का लिंक मांग रहे हैं, वहीं एक बड़ा वर्ग इस तरह की हरकतों की कड़ी आलोचना कर रहा है। कई यूजर्स ने साइबर सेल को टैग करते हुए वीडियो को हटाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी बर्बाद करने जैसा है।
आमतौर पर ऐसे मामलों में साइबर पुलिस स्वत: संज्ञान लेती है या पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई करती है।
लिंक ब्लॉक करना: पुलिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजकर वायरल वीडियो के लिंक्स को ब्लॉक करवाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
ओरिजनल सोर्स की तलाश: जांच एजेंसियां उस पहले आईपी एड्रेस (IP Address) का पता लगाने की कोशिश करेंगी जहां से यह वीडियो सबसे पहले अपलोड किया गया था।
इस तरह की घटनाएं पीड़ितों, विशेषकर छात्राओं पर गहरा मानसिक प्रभाव डालती हैं। समाज में बदनामी के डर से कई बार पीड़ित डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। यह घटना युवाओं के लिए भी एक सबक है कि डिजिटल युग में अपने निजी पलों को रिकॉर्ड करना कितना जोखिम भरा हो सकता है। साथ ही, यह समाज के लिए एक सवाल है कि क्या हम इतने असंवेदनशील हो गए हैं कि किसी की बदनामी हमारे लिए मनोरंजन का साधन बन गई है?