गुजरात में एक नकली नोट छापने वाले गैंग का पर्दाफाश हो गया है। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।
नकली नोट (Counterfeit Currency Notes) छापने के रैकेट दुनियाभर में कई जगह चलते हैं, जो एक बड़ी समस्या है। नकली नोट छापने के अपराध से भारत भी अछूता नहीं है। देश में अक्सर ही इस तरह के मामले सामने आते हैं जब नकली नोट छापने वाले गैंग का पर्दाफाश होता है। अब एक बार फिर ऐसा ही मामला सामने आया है और गुजरात (Gujarat) में नकली नोट छापने के रैकेट का पर्दाफाश हुआ है।
गुजरात के शहर सूरत में नकली नोटों का रैकेट चल रहा था। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने इस रैकेट का पर्दाफाश करते हुए आरोपियों की साजिश को नाकाम कर दिया।
नकली नोट छापने के रैकेट का पर्दाफाश करते हुए अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने योगगुरु प्रदीप और सूरत में आश्रम चलाने वाले प्रदीप जोटंगिया सहित 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों के पास से 2.38 करोड़ रुपए के नकली नोट, प्रिंटर, कटर और सिक्योरिटी थ्रेड पेपर बरामद किए गए हैं।
डीसीपी अजीत राज्यान ने बताया कि उन्हें बुधवार को सूचना मिली थी कि सूरत से अहमदाबाद के अमराईवाड़ी इलाके में नकली नोटों की खेप लाई जा रही है। ऐसे में पुलिस ने नाकेबंदी कर एक कार से 500 रुपए के 42,000 जाली नोट (2.10 करोड़ रुपए) बरामद हुए। कार में सवार एक महिला समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के आधार पर सूरत में दबिश देकर एक और आरोपी को पकड़ा गया, जहाँ से 28 लाख के नकली नोट और उपकरण मिले।
पुलिस ने बताया कि मामले में मुख्य आरोपी मुकेश ठुम्मर की देखरेख में सूरत के मकान में चार महीने से नकली नोट छापने का काम चल रहा था। आरोपियों ने करीब 15 लाख रुपए निवेश कर हाई क्वालिटी प्रिंटर और पेपर कटिंग मशीन खरीदी थी। वहीं चीन से विशेष सिक्योरिटी थ्रेड वाला कागज भी ऑनलाइन मंगाया गया था। इसमें एआई टूल से अलाइनमेंट सेट किया गया।
पूछताछ में सामने आया कि योगगुरु प्रदीप के आश्रम में नकली नोट छापने की साजिश रची गई थी। आरोपी 20-25% कमीशन लेकर नकली नोट उपलब्ध कराते थे। आरोपियों ने बताया कि वो पहले ही करीब 10 से ज़्यादा के नोट दुकानों पर खपा चुके हैं।