बेंगलुरु में नौ महीने की गर्भवती महिला ने पति और ससुराल पर मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से घरेलू हिंसा का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां नौ महीने की गर्भवती महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत के अनुसार, 34 वर्षीय ज्योति पांडे की शादी वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी के अनुराग पांडे से हुई थी। शादी के बाद वह अपने पति के साथ बेंगलुरु आ गई थीं, जहां पति नौकरी करता था। शुरुआती चार वर्षों तक दोनों पति-पत्नी के बीच सब कुछ अच्छा रहा, लेकिन पहली गर्भावस्था के बाद हालात बदलने लगे और यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।
महिला का आरोप है कि पहली बार गर्भवती होने के बाद पति ने बिना किसी ठोस कारण के उसके चरित्र पर संदेह करना शुरू कर दिया। इसके बाद मानसिक दबाव, अपमान और मारपीट की घटनाएं बढ़ने लगीं। पहले बच्चे के जन्म के बाद भी यह कथित उत्पीड़न रुक रुक कर जारी रहा। एफआईआर में दर्ज बयान के मुताबिक 2021 से 2025 के बीच महिला को कई बार शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि जब वह कुछ समय के लिए तमिल नाडु में रह रही थी, तब भी पति और ससुराल वालों ने उसके साथ झगड़ा किया और शारीरिक हमला किया। इन घटनाओं ने उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला।
ज्योति ने बताया कि दूसरी गर्भावस्था के दौरान भी पति ने उसके चरित्र पर संदेह जताया। आरोप है कि इसी दौरान उसके साथ मारपीट की गई और एक बार उसे घर से बाहर भी निकाल दिया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि नौ महीने की गर्भवती होने के बावजूद उसके स्वास्थ्य की परवाह किए बिना उसे मानसिक और शारीरिक यातना दी गई। घटनाओं के बाद वह कुछ समय के लिए अपनी मां के घर चली गई थीं।
फैमिली काउंसलिंग और महिला हेल्पलाइन से संपर्क करने के बाद उन्होंने कानूनी कदम उठाने का फैसला किया। उन्होंने साउथ वूमेन पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और पति व ससुराल पक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और संबंधित धाराओं के तहत जांच प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।