
देश में साइबर ठगी लगातार गंभीर चुनौती बनती जा रही है। पिछले पांच वर्षों में साइबर ठगों ने लोगों से करीब 55,050 करोड़ रूपए की ठगी की है। इस दौरान 65.89 लाख से ज़्यादा वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें और 1.95 लाख से ज़्यादा एफआईआर दर्ज हुईं। हालांकि सरकार ने सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफसीएफआरएमएस) के ज़रिए करीब 11,158 करोड़ रूपए से ज़्यादा की राशि बचाने में सफलता हासिल की। यह जानकारी मंगलवार को लोकसभा में गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने लिखित उत्तर में दी।
सरकार के अनुसार 2021 से 2025 के बीच राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) और सीएफसीएफआरएमएस पर प्राप्त शिकायतों में 8,189 करोड़ रूपए से ज़्यादा की राशि पर वैधानिक रोक लगाई गई। एनसीआरबी की क्राइम इन इंडिया-2024 रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में पहली बार साइबर अपराध के मामले एक लाख के आंकड़े को पार कर 1,01,928 तक पहुंच गए। इनमें तेलंगाना 27,230 मामलों के साथ सबसे ऊपर रहा, जबकि राजस्थान में 1,527 मामले दर्ज किए गए।
एलआईसी के पास 7,318.50 करोड़ रूपए की अनक्लेम्ड राशि है, जिस पर किसी ने दावा पेश नहीं किया है। वहीँ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के निष्क्रिय खातों में 9,330.56 करोड़ रूपए जमा हैं।
केंद्र सरकार ने 2024 से अब तक 11 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया है। लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि इन मामलों में 1,303.16 करोड़ रुपये की संपत्तियाँ जब्त की गई हैं। आठ आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि चार के प्रत्यर्पण के लिए संबंधित देशों को अनुरोध भेजा गया है। सरकार के अनुसार आर्थिक अपराधों के पीड़ितों को अब तक 73,015.03 करोड़ रूपए मूल्य की संपत्तियाँ लौटाई जा चुकी हैं।
केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में उपकर (सेस) और अधिभार (सरचार्ज) से 6.69 लाख करोड़ रूपए जुटाए हैं। यह देश के सकल कर राजस्व का 16.4% है। सरकार को सबसे ज़्यादा आय स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर, जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर से हुई।