Delhi Excise Policy: अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली आबकारी मामले में बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि वे कोर्ट में पेश नहीं होंगे। उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से न्याय की उम्मीद न होने और महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलते हुए सत्याग्रह का रास्ता अपनाने की बात कही।
Delhi Excise Policy: आम आदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को X के ऑफिशियल हैंडल पर एक पोस्ट और एक वीडियो पोस्ट की। इन पोस्ट में उन्होंने दिल्ली आबकारी नीति मामले से संबंधित ऐलान किया। उन्होंने वीडियो में कहा कि अब उन्हें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही है। अपनी अंतरात्मा की आवाज और महात्मा गांधी के सिद्धांतों को मानते हुए उन्होंने फैसला किया है कि वे इस केस में कोर्ट में पेश नहीं होंगे और न ही अपनी तरफ से कोई दलील रखेंगे। अरविंद केजरीवाल के इस एक्शन पर बीजेपी ने उन पर तंज कसे हैं।
अरविंद केजरीवाल ने जो वीडियो अपलोड की, वह 9 मिनट 39 सेकंड की थी। वीडियो की शुरुआत में उन्होंने कहा कि जिंदगी में कई बार ऐसे मौके आते हैं, जहां जीत-हार से ज्यादा सही और गलत का सवाल ज्यादा जरूरी होता है। आगे उन्होंने कहा कि आज वह ऐसे ही मोड़ पर खड़े हैं। आगे उन्होंने कहा कि आप सब जानते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें झूठे केस में फंसाया गया, जेल भेजा गया और उनकी सरकार को गिराया गया, लेकिन आखिर में 27 फरवरी को अदालत ने उन्हें निर्दोष घोषित कर दिया और सच की जीत हुई।
केजरीवाल ने बताया कि पहले अदालत ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाए थे और जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद सीबीआई ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां मामला जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के पास गया। उन्होंने कहा कि जिस विचारधारा वाली सरकार ने उन पर आरोप लगाकर जेल भेजा, उसी विचारधारा से जुड़े एक संगठन के कार्यक्रमों में जज साहिबा कई बार जा चुकी हैं। उनका कहना है कि वे और उनकी पार्टी उस विचारधारा के खिलाफ हैं। साथ ही इस केस में उनके खिलाफ केंद्र सरकार की CBI है। वहीं जज के बच्चे भी केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि कोर्ट में सरकार की तरफ से तुशार मेहता पेश होते हैं और वही वकीलों को केस देते हैं। ऐसे में जज के बच्चों का काम और कमाई भी कहीं न कहीं उन्हीं पर निर्भर है। इसलिए उनके मन में सवाल उठता है कि क्या उन्हें ऐसे में वहां निष्पक्ष न्याय मिल पाएगा।
आपको बता दें कि इसी वजह से कोर्ट में केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को इस केस अलग करने की दलील पेश की थी, लेकिन उनकी यह दलीलें खारिज कर दी गई थी।
आगे उन्होंने कहा कि उन्हें देश की अदालतों पर पूरा भरोसा है और वे उनका सम्मान करते हैं, क्योंकि पहले भी कोर्ट ने उन्हें राहत दी, बेल दी और बेगुनाह बताया। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ उनका नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे से जुड़ा है। फिर महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर न्याय न मिले, तो बिना गुस्से के शांति से सत्याग्रह करना चाहिए और जो भी परिणाम हो, उसे स्वीकार करना चाहिए।
केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने अपना फैसला जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को चिट्ठी लिखकर बता दिया है और उनका उनसे कोई निजी विरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में ऐसा केस होगा जिसमें केंद्र सरकार या तुशार मेहता शामिल नहीं होंगे, तो वे जरूर कोर्ट में पेश होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि वे सुप्रीम कोर्ट जाने के अधिकार को सुरक्षित रख रहे हैं। केजरीवाल के अनुसार यह मामला बहुत संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि इस मामले में यह कदम वह गुस्से में या अहंकार में नहीं उठा रहे हैं।