Delhi Excise Policy Case: दिल्ली आबकारी नीति मामले में आज हाईकोर्ट में अरविंद केजरीवाल की कानूनी मुश्किलों पर अहम सुनवाई होगी। CBI की अपील के साथ-साथ AAP नेताओं के खिलाफ अवमानना मामले पर भी अदालत में सुनवाई तय है।
Delhi HC Hearing on Arvind Kejriwal: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए मंगलवार का दिन कानूनी मोर्चे पर बेहद अहम रहने वाला है। दिल्ली हाईकोर्ट में आज आबकारी नीति मामले और अदालत की अवमानना से जुड़े दो अलग-अलग मामलों पर सुनवाई होगी। इन मामलों में केजरीवाल के साथ AAP के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट की दो अलग-अलग बेंच इन मामलों की सुनवाई करेंगी। एक ओर सीबीआई की उस अपील पर सुनवाई होगी जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल और अन्य आरोपियों को दिए गए डिस्चार्ज को चुनौती दी गई है, वहीं दूसरी ओर अदालत की अवमानना मामले में भी सुनवाई तय है।
दिल्ली की नई आबकारी नीति से जुड़े मामले में ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को राहत देते हुए डिस्चार्ज कर दिया था। इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस मनोज जैन की अगुवाई वाली बेंच करेगी। सीबीआई का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला तथ्यों और जांच के आधार पर सही नहीं था, इसलिए उसे रद्द किया जाना चाहिए।
केजरीवाल और AAP नेताओं के खिलाफ चल रहे आपराधिक अवमानना मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच करेगी, जिसमें जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा शामिल हैं। यह मामला उस वक्त शुरू हुआ जब जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और दुर्गेश पाठक समेत कई नेताओं के खिलाफ कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों को लेकर अवमानना कार्यवाही शुरू की थी।
हाल ही में जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने कहा था कि जिस जज ने अवमानना की कार्यवाही शुरू की हो, वह उसी मामले की आगे सुनवाई नहीं कर सकता।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 20 अप्रैल को दिया गया उनका आदेश, जिसमें केजरीवाल की ट्रांसफर और रिक्यूजल याचिका खारिज की गई थी, वह बरकरार रहेगा।
जस्टिस शर्मा ने अपने आदेश में कहा था कि रिक्यूजल याचिका खारिज होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने 'विलिफिकेशन' और 'इंटिमिडेशन' का रास्ता अपनाया। अदालत के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट जाने के बजाय उन्होंने सुनवाई का बहिष्कार करने की घोषणा की और एक वीडियो जारी कर जज पर राजनीतिक प्रभाव में काम करने जैसे आरोप लगाए। अदालत ने कहा था कि ऐसे कदमों से न्यायपालिका की स्वतंत्रता और अदालत की निष्पक्षता को लेकर जनता के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश की गई।
अप्रैल में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं ने जस्टिस शर्मा से मामले से अलग होने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद केजरीवाल ने अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करने की बात कही थी।
मामले में वरिष्ठ वकीलों को अमीकस क्यूरी नियुक्त करने का फैसला भी लिया गया था, लेकिन सुनवाई कई बार टलती रही।
अब आज की सुनवाई पर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों की नजर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला दिल्ली की राजनीति और AAP नेतृत्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।