
Delhi High Court News: दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर चुनाव आयोग से आम आदमी पार्टी (AAP) का पंजीकरण रद्द करने और पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है। इस याचिका पर जज ने सुनवाई की और इसे खारिज कर दिया।
बता दें कि याचिका सतीश कुमार अग्रवाल ने दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली आबकारी नीति मामले से जुड़ी सुनवाई के दौरान AAP नेताओं ने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत की कार्यवाही में शामिल होने से इनकार किया।
इस तरह का रवैया संवैधानिक अदालत की गरिमा और अधिकार को कमजोर करता है। साथ ही यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A(5) के तहत संविधान के प्रति “सच्ची निष्ठा और आस्था” रखने की शर्त का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि यह PIL न्याय व्यवस्था में जनता के भरोसे को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए दायर की गई है कि राजनीतिक पद या प्रभाव के बावजूद अदालत की कार्यवाही का सम्मान सभी के लिए समान रूप से अनिवार्य हो।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनी और अंत में याचिका खारिज कर दी। जज ने याचिकाकर्ता की दलीलों में कोई दम नहीं पाया। कोर्ट ने कहा कि याचिका बिना सोचे-समझे, बिना किसी ठोस आधार के दायर कर दी गई है।
याचिका में मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला भी दिया है। उन्होंने दावा किया कि 27 अप्रैल 2026 को अरविंद केजरीवाल ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह आबकारी नीति मामले से जुड़ी सुनवाई में जस्टिस शर्मा की अदालत में न तो खुद पेश होंगे और न ही अपने वकील को भेजेंगे। इसके बाद मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से भी कथित तौर पर इसी तरह का रुख अपनाने की बात कही गई।
पिटीशन में कहा गया है कि अदालत के आदेशों से असहमति होने पर कानूनी उपाय, जैसे ऊपरी अदालत में अपील, उपलब्ध हैं, लेकिन किसी भी पक्षकार को अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करने का अधिकार नहीं है। ऐसा करने से न्यायपालिका में जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है और एक गलत परंपरा शुरू हो सकती है।