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CJP प्रोटेस्ट में महिला को थप्पड़ मारने वाले अफसर को राहत, दिल्ली HC ने कहा- सिर्फ एक वीडियो देख छवि खराब न करें

Delhi Police ADCP Sandeep Lamba: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक जांच से एडिशनल DCP संदीप लांबा को हटाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ एक वायरल वीडियो के आधार पर किसी अधिकारी को पक्षपाती नहीं माना जा सकता।
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Sandeep Lamba, Delhi Police ADCP
संदीप लांबा, दिल्ली पुलिस ADCP (फोटो-ANI)

Delhi High Court on Sandeep lamba: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए वायरल वीडियो में दिखने के बाद विवादों में घिरे एडिशनल DCP संदीप लांबा को दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें पुलिस द्वारा कथित उत्पीड़न से जुड़े मामले की जांच से संदीप लांबा को हटाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस गिरीश कथपालिया की अध्यक्षता वाली बेंच ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ एक वायरल वीडियो के आधार पर किसी पुलिस अधिकारी की ईमानदारी पर सवाल नहीं उठाया जा सकता और न ही उसकी छवि खराब की जा सकती है।

हाई कोर्ट ने कहा- क्या हमें जमीनी हकीकत का अंदाज है?

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि वायरल वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस अधिकारी ने दिन-दहाड़े एक महिला को थप्पड़ मारा। याचिकाकर्ता का कहना था कि ऐसे व्यवहार से अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं और उन्होंने मांग की कि जांच किसी दूसरे वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए। इन तर्कों को खारिज करते हुए जस्टिस कथपालिया ने कहा, "सिर्फ इसलिए कि उन्हें एक महिला को थप्पड़ मारते हुए वीडियो में देखा गया, हम उनकी छवि खराब नहीं कर सकते। क्या हमें जमीनी हकीकत का अंदाजा है? अगर भीड़ संसद में घुस जाती और गोलीबारी शुरू हो जाती, तो कितनी जानें जातीं?"

कोर्ट ने आगे कहा कि भले ही नागरिकों को विरोध करने का मौलिक अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का मतलब यह नहीं है कि वे संप्रभुता के प्रतीकों जैसे संसद भवन को नुकसान पहुंचाएं या सुरक्षा में सेंध लगाएं। बेंच ने कहा कि अगर किसी घटना में बल का प्रयोग होता है, तो हर मामले में अधिकारी को पक्षपाती नहीं माना जा सकता और न ही ऐसे आधारों पर पूरी पुलिस फोर्स को बदनाम किया जाना चाहिए।

क्या है मामला?

यह याचिका 68 वर्षीय महिला ने दायर की थी। उनका आरोप था कि 2025 में रमजान के दौरान उन्हें जबरन उनके घर से उठाया गया और रात भर पुलिस स्टेशन में गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जंतर-मंतर पर हाल ही में हुई थप्पड़ मारने की घटना का वीडियो देखने के बाद, उन्हें अपनी शिकायत की निष्पक्ष जांच करने की एडिशनल DCP संदीप लांबा की क्षमता पर भरोसा नहीं रहा। याचिकाकर्ता ने पहले आरोप लगाया था कि लांबा ने उनका बयान दर्ज किए बिना ही जांच बंद करने का नोट जारी कर दिया था। बाद में हाई कोर्ट के दखल के बाद 13 जुलाई को उनका आधिकारिक बयान दर्ज किया गया।

बुजुर्ग महिला की शिकायत की जांच हो चुकी है पूरी

सुनवाई के दौरान, दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल (ASC) ने हाई कोर्ट को बताया कि बुजुर्ग महिला की शिकायत की जांच पूरी हो चुकी है और उनका बयान दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने कहा कि एडिशनल DCP लांबा ने अंतिम निर्णय के लिए अपनी रिपोर्ट सक्षम अधिकारी को भेज दी है और याचिकाकर्ता को परिणाम के बारे में सूचित किया जाएगा।

दिल्ली पुलिस के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए, हाई कोर्ट ने कहा कि याचिका में अब फैसला करने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। नतीजतन, कोर्ट ने याचिका को निष्फल मानते हुए खारिज कर दिया।

Updated on:
28 Jul 2026 06:14 pm
Published on:
28 Jul 2026 06:01 pm