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रैली टालने के लिए दिल्ली के व्यापारियों ने अब सोनिया गांधी से की अपील, कहा- राहुल गांधी ने मना कर दिया, आपसे आखिरी उम्मीद

राहुल गांधी द्वारा 1 नवंबर को होने वाली रैली की तारीख या स्थान बदलने से इनकार करने के बाद अब दिल्ली के व्यापारियों ने सोनिया गांधी का दरवाजा खटखटाया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कहा है कि अब उनसे ही आखिरी उम्मीद बची है।
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Updated: 30 Oct 2026, 9:16 AM IST
Sonia Gandhi Case
सोनिया गांधी। फाइल फोटो- पत्रिका

Delhi traders appeal Sonia Gandhi: दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने अब सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। संगठन ने पत्र में ने गुहार लगाई है कि धनतेरस और दीपावली के व्यापारिक सीजन को देखते हुए इस रैली को 10-11 नवंबर के बाद तक स्थगित कर दिया जाए या फिर इसका स्थान बदलकर बुराड़ी मैदान कर दिया जाए। संगठन ने बताया कि राहुल गांधी द्वारा उनका अनुरोध ठुकरा दिए जाने के बाद, अब दिल्ली के व्यापारियों की आखिरी उम्मीद सोनिया गांधी से ही है।

राहुल गांधी के इनकार के बाद सोनिया गांधी को पत्र

CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल और अन्य पदाधिकारियों द्वारा भेजे गए इस पत्र में व्यापारियों ने कहा है कि वे किसी राजनीतिक दल या विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन धनतेरस और दीपावली के मौके पर वे केवल अपने परिवार और कामगारों की रोजी-रोटी बचाने की अपील कर रहे हैं।

व्यापारियों ने पत्र में लिखा, "सोनिया जी, आपने हमेशा छोटे व्यापारियों और कामगारों की समस्याओं को सुना है। हमने राहुल गांधी जी से इस रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। अब हमारी अंतिम उम्मीद केवल आपसे है कि आप हमारी पीड़ा समझेंगी।"

12,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

व्यापारी संगठन ने अपने पत्र में बताया है कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दीपावली का त्योहार है। 1 नवंबर का दिन त्योहार की तैयारियों, थोक खरीद और सप्लाई चेन के लिहाज से पूरे साल का सबसे व्यस्त दिन होता है।

CTI ने कहा कि अगर 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली के लिए सेंट्रल दिल्ली में 10 लाख लोग और 15,000 से 20,000 वाहन इकट्ठा होते हैं, तो चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, खारी बावली, नया बाजार, करोल बाग, चावड़ी बाजार और कश्मीरी गेट सहित 20 ऐतिहासिक बाजारों में होने वाला रोजाना 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का कारोबार पूरी तरह से ठप हो जाएगा।

CTI ने सोनिया गांधी के सामने गिनाए 4 बड़े संकट

  • पार्किंग की भारी कमी: रामलीला मैदान के पास 200 बड़ी बसों को खड़ा करने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। 10 लाख लोगों की आवाजाही के लिए 15,000 से 20,000 बसों, कारों और अन्य वाहनों की जरूरत होगी। ये वाहन JLN मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, अजमेरी गेट और चांदनी चौक के आसपास खड़े किए जाएंगे, जिससे पूरे सेंट्रल और पुरानी दिल्ली में भारी ट्रैफिक जाम लग जाएगा।
  • सप्लाई चेन में रुकावट का खतरा: रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में 300 साल पुराने चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, खारी बावली, नया बाजार, कश्मीरी गेट, भागीरथ पैलेस, चावड़ी बाजार और करोल बाग जैसे 20 प्रमुख बाजार हैं। जहां हर दिन दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से 5,000 ट्रक आते हैं, जबकि 3,000 ट्रक देश के विभिन्न राज्यों और NCR के 25 शहरों के लिए सामान लेकर निकलते हैं। ट्रैफिक जाम के कारण यह पूरी आवाजाही पूरी तरह से ठप हो जाएगी।
  • 31 अक्टूबर से ही असर दिखना शुरू हो जाएगा: रैली के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले वाहन 31 अक्टूबर की दोपहर से ही सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर पर इकट्ठा होने लगेंगे और उसी शाम से वहां बैरिकेड्स भी लगा दिए जाएंगे। ट्रांसपोर्टरों ने 31 अक्टूबर से इन इलाकों में सामान ले जाने से मना करना शुरू कर दिया है, जिसका मतलब है कि आर्थिक नुकसान 1 नवंबर से पहले ही शुरू हो जाएगा।
  • 10 अक्टूबर का उदाहरण: पत्र में याद दिलाया गया है कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर केवल 5,000 से 7,000 लोगों के इकट्ठा होने से सेंट्रल दिल्ली में 8 घंटे तक भारी ट्रैफिक जाम लग गया था। इसे देखते हुए 10 लाख लोगों के आने से शहर का ढांचा चरमरा जाएगा।
Updated on:
30 Oct 2026, 9:16 AM IST
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