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परिसीमन विधेयक: परिसीमन आयोग तय करेगा राज्यों की विधानसभाओं में सीटों की संख्या, SC-ST सीटों में भी होगा महिला आरक्षण

संसद के विशेष सत्र में NDA सरकार परिसीमन विधेयक-2026 पेश करेगी। इस विधेयक में राज्यों की विधानसभा सीटों की संख्या तय करने का अधिकार परिसीमन आयोग को दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

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Apr 15, 2026
सांकेतिक इमेज

Delimitation Bill 2026: केंद्र सरकार गुरुवार से शुरू हो रही संसद की विशेष बैठक में प्रस्तावित परिसीमन विधेयक-2026 पेश करेगी। इस विधेयक में राज्यों की विधानसभा सीटों की संख्या तय करने का अधिकार परिसीमन आयोग को दिए जाने का प्रावधान किया गया है। जनगणना 2011 के आंकड़ों के आधार पर आयोग न केवल सीटों का विस्तार करेगा, बल्कि महिला आरक्षण की जमीन भी तैयार करेगा। परिसीमन आयोग सबसे पहले राज्यों की जनगणना आंकड़ों की जांच करेगा। जिस राज्य की जितनी जनसंख्या होगी, उसी अनुपात में वहां की विधानसभा सीटों की संख्या तय की जाएगी।

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सीटों में बढ़ोतरी

परिसीमन विधेयक-2026 में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि आयोग को विधानसभा की सीटों की कुल संख्या को फिर से समायोजित करने का अधिकार होगा। चूंकि देश की आबादी बढ़ी है, इसलिए आयोग ज्यादातर राज्यों में सीटों की संख्या को बढ़ाएगा। इसके अलावा आयोग न केवल कुल सीटें तय करेगा, बल्कि यह भी निर्धारित करेगा कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए कितनी सीटें होंगी। इसके साथ ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीट आरक्षित की जाएंगी। आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए आनुपातिक सुरक्षित सीटें होंगी।

भौगोलिक और प्रशासनिक तालमेल

सीटें बढ़ाते समय परिसीमन आयोग केवल कागजी आंकड़े नहीं देखेगा, बल्कि वह जिले की सीमाओं, संचार की सुविधाओं और पहाड़ी या मैदानी भौगोलिक स्थितियों का भी ध्यान रखेगा ताकि चुनाव कराने में प्रशासनिक आसानी हो। आयोग की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इसमें त्रिस्तरीय ढांचा रखा गया है। आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज करेंगे, जबकि मुख्य चुनाव आयुक्त और संबंधित राज्यों के चुनाव आयुक्त इसके सदस्य होंगे। इसके साथ ही प्रत्येक राज्य से 10 (5 सांसद और 5 विधायक) सहयोगी सदस्य भी होंगे। यह सदस्य आयोग की मदद करेंगे, ताकि क्षेत्रीय जरूरतों का ध्यान रखा जा सके।

विपक्ष के सहयोग के बिना बिल पारित होना आसान नहीं

लोकसभा में NDA सरकार की स्थिति मजबूत है, लेकिन विपक्ष के सहयोग के बिना संविधान संशोधन पारित कराना आसान नहीं है। 543 सदस्यों वाली सदन में एनडीए के पास 294 सीटें है। सामान्य विधेयक के लिए यह 272 के बहुमत के आंकड़े से काफी ऊपर है, लेकिन संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और वोटिंग के समय मौजूद सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन जरूरी होगा। इसका मतलब है कि सभी सदस्य मौजूद रहते हैं तो सरकार को करीब 362 वोटों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में NDA को अपने गठबंधन से बाहर के दलों से लगभग 68 से 70 अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे।

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Updated on:
15 Apr 2026 05:58 am
Published on:
15 Apr 2026 05:57 am
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